PM मोदी की तीन देशों की रणनीतिक यात्रा कल से शुरू; फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात के बाद G7 समिट में होंगे शामिल

*SHABD, नई दिल्ली, 12 जून 2026:** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 13 जून से फ्रांस और स्लोवाकिया की एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष निमंत्रण पर आयोजित इस दौरे को लेकर राजनयिक गलियारों में काफी हलचल है। तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 13 से 14 जून और फिर 16 से 18 जून को फ्रांस (एवियन और पेरिस) की यात्रा पर रहेंगे, जबकि इसके बीच में 14 से 16 जून 2026 तक वे स्लोवाकिया के दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस बहुप्रतीक्षित यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 14 जून को फ्रांस के नीस (Nice) शहर में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों वैश्विक नेता भारत-फ्रांस संबंधों के सभी आयामों की व्यापक समीक्षा करेंगे, जिन्हें इसी वर्ष की शुरुआत में एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Special Global Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया गया है। रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार और तकनीक के अलावा आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई पर भी दोनों देशों के बीच गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है।

नीस में होने वाली इस मुलाकात के दौरान एक बड़ा आकर्षण ‘भारत इनोवेट्स’ (India Innovates) कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन होगा। भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष (India-France Year of Innovation) के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और दुनिया भर के शीर्ष इनोवेशन स्टार्टअप्स, टेक एक्सपर्ट्स और बड़े वेंचर कैपिटल फंड्स एक मंच पर जुटेंगे। यह अनूठी पहल दोनों देशों के बीच मौजूद जीवंत और अत्याधुनिक नवाचार साझेदारी को एक नए मुकाम पर ले जाने का काम करेगी। इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया का अपना दौरा संपन्न कर 16 से 17 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में हिस्सा लेंगे। वैश्विक आर्थिक स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भारत इस मंच से दुनिया को अपना दृष्टिकोण देगा। इस व्यस्त और बहु-स्तरीय विदेशी दौरे को भारत की बढ़ती वैश्विक साख और मजबूत विदेश नीति के एक और उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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