SHABD, नई दिल्ली, 19 जून:** अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम समझौते के बाद अब दोनों देशों के बीच 60 दिनों की एक बेहद महत्वपूर्ण और गहन वार्ता प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वैश्विक कूटनीति में इस कदम को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इस 14-सूत्रीय समझौते के तहत न केवल लेबनान सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बेहद जटिल और विवादित मुद्दों पर एक स्थायी समाधान खोजने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। इस पूरे समझौते का सबसे संवेदनशील और मुख्य हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलना और ईरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी को हटाना है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार को बड़ी राहत मिल सके। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बात की पुष्टि की है कि इस पूरे रोडमैप और वार्ता को अमलीजामा पहनाने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है, जिसकी शुरुआत बीते गुरुवार से हो चुकी है और वे स्वयं अमेरिकी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि, रक्षा और विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना अविश्वास और कई जटिल भू-राजनीतिक मुद्दे इतने गहरे हैं कि महज 60 दिनों के भीतर किसी अंतिम और सर्वमान्य समाधान पर पहुंचना एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा लचीला रुख अपनाते हुए साफ किया है कि वे इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी के बिना ही ईरान पर लगाए गए कुछ कड़े प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने के लिए तैयार हैं।
