शब्द, नई दिल्ली, 15 जून:** अंतरराष्ट्रीय पटल से एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है, जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान ने गहन वार्ताओं के बाद एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति जता दी है। रविवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद दोनों देश लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपने सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने के लिए प्रतिबद्ध हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसे क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि इस ऐतिहासिक समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। हालांकि, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है, लेकिन ट्रंप ने तर्क दिया कि इस समझौते ने इजराइल को एक संभावित विनाशकारी परिणाम से सुरक्षित किया है।
इस समझौते के मसौदे के तहत, अगले 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को पूरी तरह से हटा लिया जाएगा और ईरानी तेल व पेट्रोकेमिकल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया जाएगा। साथ ही, ईरान द्वारा प्रबंधित व्यवस्था के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों के भीतर फिर से खोल दिया जाएगा। इस सहमति पत्र (MoU) पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने तय हुए हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने जानकारी दी है कि 60 दिनों के युद्धविराम की अवधि के दौरान एक और व्यापक समझौते पर बातचीत की जाएगी, जिसमें ईरान के लिए प्रतिबंधों से और राहत शामिल होगी। दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि सोमवार रात से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य अभियान स्थायी रूप से समाप्त हो जाएंगे। इस बीच, अमेरिकी मांगों को लेकर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं; जहाँ इजराइल ने कहा है कि वह लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता को बरकरार रखेगा, वहीं ईरान ने वहाँ पूर्ण युद्धविराम को अपनी मांगों का एक मुख्य और महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
बड़ी खबर: अमेरिका-ईरान शांति समझौते से इजराइल असहमत, नेतन्याहू और ट्रंप के बीच उभरे मतभेद**
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