शब्द (SHABD), आकाशवाणी मुख्यालय, 24 जून:** पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की बदहाली और वहां भड़के जनाक्रोश को लेकर सीमा पार से आ रहे बयानों पर भारत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। भारत ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा PoK के मौजूदा हालात पर की गई टिप्पणियों की कड़े शब्दों में आलोचना की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे पाकिस्तान की अपनी घरेलू और प्रशासनिक नाकामियों को छिपाने तथा वहां हो रहे भीषण मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक हताश और नाकाम कोशिश करार दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए साफ किया कि PoK में सुलग रहा विरोध-प्रदर्शन कोई अचानक उपजा विवाद नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे आर्थिक शोषण, बुनियादी नागरिक अधिकारों के हनन और बदतर प्रशासनिक दमन का स्वाभाविक नतीजा है। प्रवक्ता ने वहां के जमीनी हालात का पर्दाफाश करते हुए बताया कि पाकिस्तानी प्रशासन निर्दोष और निहत्थे नागरिकों के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर रहा है; वहां जरूरी सामानों और जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति रोक दी गई है और सच को दबाने के लिए इंटरनेट तक ठप कर दिया गया है। भारत ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के इन अमानवीय कृत्यों और अत्याचारों का संज्ञान लेगा और उसे इसके लिए जवाबदेह ठहराएगा।
> **खाड़ी संकट, कतर हादसा और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर भी भारत का बड़ा बयान:**
रक्षा मंत्री के बयान पर पलटवार के साथ-साथ विदेश मंत्रालय ने कई अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी देश का रुख स्पष्ट किया। खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच राहत की खबर देते हुए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए ऐतिहासिक सहमति-पत्र के बाद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से 11 भारतीय जहाज सुरक्षित वतन लौट आए हैं, जबकि भारतीय ध्वज वाले 10 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं, जिनकी जल्द सुरक्षित वापसी की उम्मीद है। वहीं, कतर में हुए दर्दनाक धमाके पर गहरा दुख जताते हुए उन्होंने पुष्टि की कि इस हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की जान गई है और 66 घायल भारतीयों का इलाज चल रहा है, जिनके पार्थिव शरीर वापस लाने के प्रयास युद्धस्तर पर जारी हैं। इसके अलावा, भारत-यूएई के मजबूत होते रणनीतिक व रक्षा संबंधों की सराहना करने के साथ ही विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में देवी-देवताओं की मूर्तियों के अपमान और वहां भड़के विरोध-प्रदर्शनों पर चिंता जताई। भारत ने दोटूक शब्दों में कहा कि वह बांग्लादेश सरकार से वहां के अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पूरी उम्मीद करताहै।
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