पत्रकारों से बातचीत में प्रो. चंदूमाजरा ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंथ और पंजाब की नुमाइंदगी करने वाली जमात है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा पंजाब के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है, लेकिन मौजूदा हालात में प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी भूमिका न निभा पाने का उन्हें दुख है। उन्होंने कहा कि सरकार के जनविरोधी और पंजाब विरोधी फैसलों के खिलाफ सक्रिय राजनीतिक आंदोलन की कमी खल रही है।
पंजाब समर्थक ताकतों का एकजुट होना जरूरी
उन्होंने कहा कि अकाली दल के अलग-अलग धड़ों में बंटे होने का लाभ उन ताकतों को मिल रहा है, जो पंजाब और पंथ के हितों के खिलाफ हैं। आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के हितों की रक्षा के लिए सभी पंजाब समर्थक ताकतों का एकजुट होना जरूरी है।
दोनों पक्षों की सोच, विचार और कार्यशैली में तालमेल नहीं
पुनर सुरजीत अकाली दल से अलग होने के कारणों पर उन्होंने कहा कि पंथक एकता के लिए सभी धड़ों को एक मंच पर लाने की उनकी अपील पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हो गया था कि दोनों पक्षों की सोच, विचार और कार्यशैली में तालमेल नहीं है। ऐसे में उन्होंने संगठन से अलग होने का फैसला लिया।
प्रो. चंदूमाजरा ने स्पष्ट किया कि संगठन से अलग होने के बावजूद पंजाब, पंथ, पंजाबी भाषा-संस्कृति और प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले की तरह बनी रहेगी।

