मोहाली– अकाली नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 40 हजार पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इसमें करीब 700 करोड़ रुपए के लेनदेन का जिक्र किया गया है। ट्रंकों में भरकर चार्जशीट को विजिलेंस टीम लेकर पहुंची थी।

इस मामले में विजिलेंस ने गुरमेहर सिंह, साले गज्जपत सिंह ग्रेवाल, हरप्रीत गुलाटी, अमरदीप सिंह और 10 कंपनियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है।
इससे पहले विजिलेंस ब्यूरो बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुका है। बुधवार को दाखिल की गई नई चार्जशीट के बाद दोनों चार्जशीट के दस्तावेजों की कुल संख्या करीब 53 हजार पन्ने हो गई है। अब तक कुल चार चार्जशीट दाखिल की। इससे पहले विजिलेंस ब्यूरो ने अगस्त में भी इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
अब जानिए मामला…
- 2007 से 2017: संपत्ति की जांच: विजिलेंस ब्यूरो के मुताबिक, इस अवधि में मजीठिया से जुड़ी संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जांच की गई। एजेंसी ने आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप लगाया। संपत्ति के मूल्य को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 540 करोड़ से 700 करोड़ रुपए से अधिक तक के आंकड़े सामने आए हैं। इन्हें अदालत में साबित हो चुके तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
- 25 जून 2025: विजिलेंस ने गिरफ्तार किया: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR नंबर 22 दर्ज की। इसी दिन उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
- 18 अगस्त 2025: निचली अदालत से जमानत नहीं मिली: मोहाली की अदालत ने मजीठिया की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद भी वह जेल में रहे।
- 22 अगस्त 2025: 40 हजार पन्नों की चार्जशीट: विजिलेंस ब्यूरो ने मोहाली की अदालत में करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और गवाहों से जुड़ी जानकारी शामिल थी। करीब 700 करोड़ रुपए के लेनदेन का जिक्र भी सामने आया।
- 4 दिसंबर 2025: हाईकोर्ट से राहत नहीं: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मजीठिया की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
- 2 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट से जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को नियमित जमानत दे दी। वह करीब सात महीने से हिरासत में थे और इस दौरान विजिलेंस चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी। जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है।

