इसके साथ ही कर्मियों ने लंबित वेतन वृद्धि, आउटसोर्सिंग व्यवस्था से मुक्ति और कैटेगरी स्पष्ट करने जैसी मांगें पूरी न होने पर 24 तारीख से सेंटर पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

मरीज ने लाठी से हमला किया
घटना के संबंध में जानकारी देते हुए पीड़ित कर्मचारी जसपिंदर सिंह ने बताया कि वह ओट सेंटर में अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान एक मरीज पहुंचा और निर्धारित मात्रा से अधिक नशा छुड़ाने वाली दवा मांगने लगा। जब नियमों का हवाला देते हुए अधिक दवा देने से मना किया गया, तो मरीज आपा खो बैठा। उसने कर्मचारी के साथ गाली-गलौज की और लाठी से हमला कर दिया।
कर्मचारियों का कहना है कि नशा मुक्ति केंद्र में इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों द्वारा अक्सर स्टाफ कर्मियों के साथ गाली-गलौज और हाथापाई की जाती है। केंद्र में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण कर्मियों की जान को हर समय खतरा बना रहता है। कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए तुरंत कड़े सुरक्षा इंतजाम और पुलिस बल की तैनाती की मांग की है।
स्टाफ की मांगों को रेखांकित किया
वहीं, काउंसलर ओंकार सिंह ने स्टाफ की मांगों को रेखांकित करते हुए कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में 9 प्रतिशत स्पेशल वेतन बढ़ाना और 6 प्रतिशत सालाना वेतन वृद्धि को लागू करना शामिल है। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा अभी तक उनकी कर्मचारियों की कैटेगरी जारी नहीं की गई है, जबकि आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार वे ‘कैटेगरी सी’ में आते हैं।
काउंसलर ने आउटसोर्सिंग प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने आउटसोर्स से बाहर निकालने के लिए कोई स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। यदि नोटिफिकेशन जारी होता है, तो उसमें एक साल के रिन्यूअल प्रोसेस की स्थिति साफ की जानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि प्रशासन ने 3 से 4 साल में रेगुलर करने का आश्वासन दिया था, जो अभी तक अधूरा है। यदि एक सप्ताह में मांगें नहीं मानी गईं, तो 24 तारीख से कामकाज ठप कर दिया जाएगा।
