दोनों से आमने-सामने पूछताछ किए जाने की संभावना है। भोला का नाम भी ड्रग रैकेट की जांच से जुड़ा रहा है। नए समन पर प्रतिक्रिया देते हुए SAD के मुख्य प्रवक्ता अरशदीप सिंह कलेर ने पंजाब सरकार पर विधानसभा चुनाव से पहले उनके शब्दों में “समन पॉलिटिक्स” करने का आरोप लगाया। कलेर ने दावा किया कि मजीठिया के खिलाफ आरोपों की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही के दौरान पहले ही जांच हो चुकी है। अकाली नेता के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक सामने नहीं आया। हालांकि, यह कलेर का दावा है।
उन्होंने कहा कि SAD नए समन की जांच करेगा और आगे की कार्रवाई तय करेगा। इसमें यह कानूनी सवाल भी शामिल होगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट में मामला सुने जाने के बाद SIT इस तरह का समन जारी कर सकती है।
क्या है मामला…
एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज की थी FIR
20 दिसंबर 2021 को पंजाब पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बिक्रम मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत FIR दर्ज की थी। इसमें धारा 25, 27-A और 29 लगाई गई थीं। FIR का आधार 2018 की STF रिपोर्ट को बताया गया था। पुलिस का आरोप था कि मजीठिया के कुछ ऐसे लोगों से संबंध थे, जिन पर ड्रग तस्करी से जुड़े होने के आरोप थे।
मजीठिया की भूमिका की जांच
FIR में कथित गतिविधियों की अवधि 2004 से 2014 बताई गई थी। मामले में जगदीश सिंह भोला, जगजीत सिंह चहल, मनिंदर सिंह औलख उर्फ बिट्टू औलख और अन्य लोगों के बयानों का भी उल्लेख हुआ। पंजाब सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि इन बयानों और अन्य सामग्री के आधार पर मजीठिया की भूमिका की जांच की जा रही है।
अगस्त 2022 में मिली थी जमानत
हालांकि मजीठिया ने इस केस में कानूनी लड़ाई लड़ी और 2022 के विधानसभा चुनाव में अमृतसर से चुनावी मैदान में उतरे थे। इसके बाद वह जेल गए। अगस्त 2022 में उन्हें जमानत मिल गई थी। मजीठिया इस केस पर पहले से ही सवाल उठाते आए हैं।
पुलिस ने कोई रिकवरी नहीं की
मजीठिया का कहना है कि यह एनडीपीएस का मामला है, जिसमें पुलिस ने कोई रिकवरी नहीं की है। हालांकि, पुलिस ने नशा तस्करी में पकड़े गए कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
