जालंधर/अखंड केसरी ब्यूरो
स्मार्ट सिटी जालंधर को साफ-सुथरा और स्वच्छ बनाने का जिम्मा उठाने वाली नगर निगम खुद कितनी ‘स्वच्छ’ है, इसकी एक बेहद शर्मनाक और हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। निगम प्रशासन शहरवासियों को सफाई के पाठ पढ़ाता है, लेकिन निगम मुख्यालय के भीतर स्थित शौचालयों और परिसर की हालत नरक से भी बदतर हो चुकी है। यह केवल एक आरोप नहीं है, बल्कि मौके से मिली तस्वीरें और जमीनी हकीकत इसकी गवाह हैं।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा है। फर्श टूटे हुए हैं और उन पर कीचड़ व गंदगी जमा है । दीवारों पर लगी टाइलें गंदी और टूटी-फूटी हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि सफाई का फीडबैक लेने के लिए लगाई गई मशीन खुद धूल फांक रही है और उसके तार खुले लटक रहे हैं, जो निगम की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान है। इसके अलावा, परिसर में सरकारी संपत्ति, जैसे पुरानी मेज-कुर्सियाँ, खुले आसमान के नीचे कबाड़ की तरह सड़ रही हैं।
निगम के इन शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि यहाँ से गुजरना भी दूभर है। भीषण बदबू और गंदगी के कारण न केवल आम जनता, जो अपने कामों के लिए निगम दफ्तर आती है, बल्कि यहाँ तैनात अधिकारी और कर्मचारी भी इन शौचालयों का इस्तेमाल करने से कतराते हैं। सवाल यह उठता है कि जो निगम अपने दफ्तर के शौचालयों को साफ नहीं रख सकता, वह पूरे जालंधर शहर को कैसे साफ रखेगा? यह स्थिति नगर निगम के दावों और वादों की पोल खोलने के लिए काफी है और अधिकारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है। जनता अब पूछ रही है- क्या यही है स्मार्ट सिटी का सच?
