सुप्रीम कोर्ट ने आज (3 नवंबर) सुनवाई करते हुए यह फैसला इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट देखने के बाद लिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि हवारा के स्थानांतरण से पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ के सामने आज IB की रिपोर्ट पेश की गई। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में हवारा के स्थानांतरण की संभावना पर IB से जानकारी मांगी थी। पंजाब सरकार ने इससे पहले कानून-व्यवस्था पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। हवारा की याचिका में उसे पंजाब की जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है, ताकि वह अपनी बुजुर्ग मां से मिल सके। हवारा की मां की उम्र 90 वर्ष से अधिक और हालत गंभीर बताई गई है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने IB की रिपोर्ट का हवाला दिया
सुनवाई में सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने IB की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था और आगामी पंजाब चुनावों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने दलील दी कि हवारा पहले जेल से फरार होने की घटना में शामिल रहा है। बेअंत सिंह हत्याकांड में उसे सुनाई गई फांसी की सजा बाद में उम्रकैद में बदल दी गई थी।
भाटी ने आशंका जताई कि पंजाब की जेल में शिफ्ट करने से उसके फरार होने की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय की उस एडवाइजरी का हवाला दिया, जिसमें हाई रिस्क कैदियों को एक जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट करने को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने पंजाब सरकार के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा कि हवारा को शिफ्ट करने से राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भाटी ने यह भी बताया कि हवारा को चंडीगढ़ की जेल में सुरंग खोदने के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
हवारा के वकील बोले- तिहाड़ जेल सबसे सुरक्षित नहीं
हवारा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस. मुरलीधर ने गृह मंत्रालय के इस तर्क पर आपत्ति जताई कि तिहाड़ जेल हाई-सिक्योरिटी कैदियों के लिए अधिक सुरक्षित है। उन्होंने कम से कम हवारा को अपनी मां से मिलने की अनुमति देने का अनुरोध किया।
मुरलीधर ने कहा, “उनकी मां 90 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। यदि जेल में मुलाकात की अनुमति दी जा सकती है, तो मैंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में पैरोल के लिए आवेदन किया है, जो अभी लंबित है। यह नहीं कहा जा सकता कि तिहाड़ जेल पंजाब की किसी अन्य जेल से अधिक सुरक्षित है। गृह मंत्रालय ऐसा नहीं कह सकता।”
इस पर न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि आमतौर पर अदालत को जेल में मुलाकात की अनुमति देने में कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन IB की रिपोर्ट बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा कोई आदेश आगामी चुनावों में उथल-पुथल पैदा कर सकता है। इसके बाद मुरलीधर ने सुझाव दिया कि यदि चुनावों को लेकर चिंता है, तो मामले को चुनाव समाप्त होने के बाद सुना जा सकता है। अदालत ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए सुनवाई 3 महीने बाद के लिए स्थगित कर दी।

