Gen Z पर मोहन भागवत का बड़ा बयान: बोले- हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार और देशभक्त हैं युवा

मुंबई: “अगर मुझे किसी एक पीढ़ी पर भरोसा करना हो, तो मैं Gen Z पर आंख बंद करके भरोसा करूंगा।” RSS प्रमुख मोहन भागवत ने यह कहते हुए आज की युवा पीढ़ी को हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार और देशभक्त बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों को दबाने के बजाय उन्हें सुनना और समझना चाहिए।

मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि हर आंदोलन देश-विरोधी नहीं होता। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, LGBTQ समुदाय, समलैंगिक साथ (Companionship), पाकिस्तान और राष्ट्रीय एकता जैसे कई मुद्दों पर भी उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी।

मोहन भागवत के बयान से निकलने वाले 5 बड़े संदेश

  1. Gen Z पर पूरा भरोसा जताया।
  2. छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध को जायज बताया।
  3. शिक्षा को व्यापार बनाने का विरोध किया।
  4. LGBTQ समुदाय को समाज का हिस्सा बताया।
  5. राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुट रहने और संवाद से समाधान निकालने पर जोर दिया।

Gen Z को लेकर मोहन भागवत ने क्या कहा?

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें देश की नई पीढ़ी यानी Gen Z पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी एक पीढ़ी पर भरोसा करना हो, तो वह बिना किसी संकोच के Gen Z पर भरोसा करेंगे।भागवत के मुताबिक, आज के युवा ईमानदारी से बदलाव चाहते हैं। वे देश और समाज के मुद्दों को लेकर गंभीर हैं। इसलिए उनकी नीयत पर शक नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाल की घटनाओं की पूरी जानकारी उनके पास नहीं है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का इंतजार करना चाहिए। लेकिन इसके बावजूद युवाओं पर उनका भरोसा कायम है।

छात्रों के विरोध को क्यों बताया लोकतंत्र की ताकत?

मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध कोई गलत बात नहीं है। लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं होता, बल्कि संवाद और असहमति भी उसकी अहम पहचान है। उन्होंने कहा कि अगर छात्र शिक्षा व्यवस्था या किसी अन्य व्यवस्था में कमियां देखते हैं, तो उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। विरोध का उद्देश्य व्यवस्था को सुधारना होना चाहिए, न कि हिंसा या टकराव पैदा करना। भागवत ने कहा कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए। अगर युवा बदलाव की मांग कर रहे हैं, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।

‘हम सवाल नहीं पूछते थे’, पुरानी और नई पीढ़ी का अंतर समझाया

अपने संबोधन में भागवत ने पुरानी और नई पीढ़ी की सोच का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले लोग अधिकारियों या व्यवस्था से सवाल पूछने में झिझकते थे। लेकिन आज की Gen Z और Gen Alpha खुलकर सवाल पूछती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी भावनात्मक नहीं, बल्कि तार्किक जवाब चाहती है। वह सम्मान के साथ संवाद में विश्वास करती है। इसलिए युवाओं के सवालों को नकारने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।

‘हर आंदोलन देश-विरोधी नहीं होता’, भागवत ने क्यों कही यह बात?

मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी विरोध प्रदर्शन को केवल इसलिए देश-विरोधी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि लोग सड़क पर उतरकर अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की अपनी जगह होती है। अगर विरोध का मकसद व्यवस्था में सुधार लाना है, तो उसे सकारात्मक नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को देशद्रोही या राष्ट्रविरोधी कहकर उनकी बात को खारिज करना सही तरीका नहीं है। पहले उनकी बात सुननी और समझनी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन पर क्या कहा?

हाल के छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई पर भी मोहन भागवत ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मीडिया में आंसू गैस, पैलेट गन और पुलिस कार्रवाई की खबरें आई हैं। वहीं कुछ रिपोर्टों में असामाजिक तत्वों के शामिल होने का भी दावा किया गया है। भागवत ने कहा कि उनके पास इन घटनाओं की पूरी और प्रमाणित जानकारी नहीं है। इसलिए बिना तथ्यों के किसी एक पक्ष को सही या गलत नहीं कहा जा सकता।

शिक्षा व्यवस्था पर क्या बोले RSS प्रमुख?

मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा को कभी भी व्यापार या कमाई का साधन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन होना चाहिए। साथ ही शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान देना चाहिए।

शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने की मांग क्यों दोहराई?

भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय बजट का 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने की मांग नई नहीं है। यह लंबे समय से उठाई जाती रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में निवेश बढ़ाना समय की जरूरत है। हालांकि केवल सरकार के भरोसे बदलाव संभव नहीं है। उनके मुताबिक, समाज, स्वयंसेवी संस्थाएं और शैक्षणिक संगठन भी शिक्षा सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पाकिस्तान, चीन और मानवता पर क्या बोले भागवत?

राष्ट्रीय सुरक्षा और पड़ोसी देशों के मुद्दे पर भागवत ने कहा कि जब देश किसी चुनौती का सामना कर रहा हो, तब सभी नागरिकों को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थायी नफरत किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनका कहना था कि सभी पाकिस्तानी भारत के दुश्मन नहीं हैं और मानवता सबसे बड़ी पहचान है।

LGBTQ और समलैंगिक साथ पर क्या है मोहन भागवत की राय?

मोहन भागवत ने कहा कि LGBTQ समुदाय समाज का हिस्सा है और उन्हें समाज में सम्मान और स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो लोगों के साथ रहने का समझौता नहीं, बल्कि परिवार और समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है। इसलिए वह समलैंगिक विवाह के पक्ष में नहीं हैं।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाज को समलैंगिक साथ (Companionship) के लिए एक सामाजिक और कानूनी ढांचे पर विचार करना चाहिए, ताकि ऐसे लोगों को सम्मानजनक जीवन मिल सके।

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