इसके साथ ही उन्होंने आपसी भाईचारे और पंजाबी भाषा को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि धर्म और गोत्र अलग हो सकते हैं, लेकिन एक ही मिट्टी और मातृभाषा हमें आपस में जोड़ती है। उन्होंने इमामों से भी अपनी बातचीत और उपदेश पंजाबी भाषा में देने की अपील की।
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि केवल कब्रिस्तानों की नहीं, बल्कि जीवित लोगों के बेहतर भविष्य की बात भी होनी चाहिए। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जे होने और आमदनी कम होने के कारण बड़े प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की कि विधानसभा में बिल लाकर मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाने के लिए 5-5 करोड़ रुपए का विशेष फंड जारी किया जाए।

हज कमेटी का ठेका एक ही कंपनी को देना गलत
केंद्र सरकार की हज कमेटी पर शाही इमाम ने आरोप लगाया कि पिछले चार सालों से एक ही कंपनी को बार-बार ठेका दिया जा रहा है, जो हजारों करोड़ रुपए का घोटाला कर रही है और हाजी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने केंद्र से मांग की कि इस कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज ने कभी हज पर सब्सिडी नहीं ली, पिछली सरकारें सब्सिडी के नाम पर पैसा एयर इंडिया को देती थीं। अगर हज कमेटी सुविधाएं नहीं दे सकती तो इसे भंग कर दिया जाए, लोग उमराह की तरह प्राइवेट तौर पर भी हज यात्रा कर सकते हैं। अंत में उन्होंने बताया कि सभी जिलों के मुस्लिम नेताओं को अपनी स्थानीय मांगों की सूची बनाकर सरकार तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
