आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के लिए तैयार वज्र कोर, ड्रोन ऑपरेटरों के पहले बैच ने पूरी की RPTO ट्रेनिंग

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जालंधर: आधुनिक युद्धक्षेत्र की तेजी से बदलती चुनौतियों के अनुरूप अपनी प्रौद्योगिकी-आधारित युद्धक क्षमताओं को सुदृढ़ करते हुए भारतीय सेना की वज्र कोर ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कोर के ड्रोन ऑपरेटरों के प्रथम बैच ने रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (RPTO) के अंतर्गत अपना विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। इस अवसर पर वज्र कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल (युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल एवं बार) ने प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटरों से संवाद कर उनके समर्पण, अनुशासन और व्यावसायिक दक्षता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। आधुनिक सैन्य अभियानों में मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) की बढ़ती रणनीतिक भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने ऑपरेटरों को अपने तकनीकी कौशल और नवाचार के माध्यम से कोर की परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई देने के लिए प्रेरित किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सैनिकों को ड्रोन संचालन, उड़ान प्रक्रियाओं, कड़े सुरक्षा मानकों तथा युद्धक्षेत्रीय निगरानी व टोही गतिविधियों के व्यावहारिक ज्ञान से लैस करता है। कोर का यह कदम न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि वास्तविक समय पर सटीक निगरानी, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और भविष्य के रणक्षेत्र में निर्णायक बढ़त सुनिश्चित करने की दिशा में भी अत्यंत प्रभावशाली साबित होगा।

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