चावला मामले पर जालंधर में सियासी-पंथक हलचल: हरजिंदर धामी को घेरा, फैसले के पीछे साजिश का दावा

जालंधर जालंधर में अलायंस ऑफ सिख ऑर्गेनाइजेशन ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी पर निशाना साधा। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि एसजीपीसी सदस्य अमरजीत सिंह चावला पर आनंदपुर साहिब में दर्ज दुष्कर्म (रेप) मामले को एक महीना बीत जाने के बाद भी धामी चुप हैं।

नेताओं ने अकाल तख्त के जत्थेदार द्वारा इस मामले में लिए गए फैसले और एसजीपीसी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए पूरे मामले में गहरी राजनीतिक साजिश होने का दावा किया। प्रेस वार्ता के दौरान गठबंधन के नेता सुखदेव सिंह फगवाड़ा ने कहा कि बहरीन से आई पीड़ित महिला के पुलिस बयानों और मीडिया में आए वीडियो से साफ है कि एसजीपीसी सदस्य उसे छह महीने से अधिक समय तक अपना शिकार बनाता रहा।

पीड़िता ने अलग-अलग सराय और कमरों में बंधक बनाकर रेप करने का आरोप लगाया है, जिससे परेशान होकर उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया था। फगवाड़ा ने सवाल उठाया कि इस जघन्य मामले पर प्रधान धामी की चुप्पी क्या किसी बड़ी राजनीतिक साजिश को छिपाने की कोशिश है?

गड़गज्ज की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए

सिख नेताओं ने अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि तय प्रक्रिया का पालन किए बिना श्री अकाल तख्त साहिब से मामले में फैसला सुनाना इस पूरी घटना को और भी संदिग्ध बनाता है। नेताओं को अंदेशा है कि प्रधान धामी और जत्थेदार किसी राजनीतिक साजिश का खुलासा होने के डर से इस संवेदनशील मामले को जल्दबाजी में रफा-दफा करना चाहते हैं।

एसजीपीसी की प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची

नेता परमपाल सिंह सभरा ने कहा कि यह सिर्फ बलात्कार का मामला नहीं है, बल्कि यह सिख समुदाय के पवित्र तख्तों और शिरोमणि संस्था की साख से जुड़ा विषय है। इससे SGPC की प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची है। यह कौम के लिए शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने धामी से पूछा कि यह उनकी नाकामी है या वे खुद इस राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एसजीपीसी का गठन ही गुरुद्वारों में इस तरह के कुकृत्यों को रोकने के लिए हुआ था।

13 सालों से संस्था के चुनाव नहीं हुए

सिख नेता जरनैल सिंह गढ़दीवाल ने एसजीपीसी के वर्तमान प्रबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि बीते 13 सालों से संस्था के चुनाव नहीं हुए हैं। इस कारण प्रबंधन में भ्रष्टाचार पनप चुका है और यह सिख संस्थाओं के लिए खतरा बन गया है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि सिख समुदाय किसी भी राजनीतिक दल या नेता को अपने निजी स्वार्थों और कुर्सी के लालच के लिए शिरोमणि संस्था की प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगाने देगा।

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