नेपाल/नई दिल्ली: चीन से लगती हिमालयी सीमा पर स्थित नेपाल के कई शहरों और गांवों में दो हफ्ते पहले आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस विनाशकारी आपदा में अब तक 1,380 लोगों की मौ/त हो चुकी है, जबकि 5,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच शवों की शिनाख्त करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। सोमवार तक महज 98 शवों की पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंपा जा सका। वहीं, बिना पहचान वाले शवों और मानव अवशेषों की शिनाख्त के लिए पुलिस लापता लोगों के रिश्तेदारों के DNA सैंपल जुटा रही है। भविष्य में पहचान सुनिश्चित करने के मकसद से 1,000 से अधिक अज्ञात शवों के DNA नमूने सुरक्षित कर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
अस्पतालों में अज्ञात शवों की बढ़ती संख्या से व्यवस्था चरमरा गई है और परिजन अपने लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर मेडिकल सुविधाओं के बाहर दीवारों पर चिपकाई गई मृतकों की तस्वीरों में अपनों की तलाश कर रहे हैं। इस बीच, नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सोमवार को नुवाकोट और रसुवा जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें राहत वितरण, होल्डिंग सेंटरों और पुनर्वास प्रयासों की जानकारी दी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के बाद राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस कदम उठाने की अपील की, ताकि जलवायु परिवर्तन का दंश झेल रहे नेपाल जैसे हिमालयी और अन्य संवेदनशील देशों को क्लाइमेट जस्टिस (जलवायु न्याय) मिल सके।
