यह प्रदर्शन मुख्य रूप से केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि 12 साल पहले जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंगनवाड़ी वर्करों के लिए मानदेय में वृद्धि और पेंशन स्कीम लागू करने का वादा किया था। हालांकि, इतने साल बीत जाने के बाद भी मानदेय में कोई सुधार नहीं किया गया है।

योजना के तहत उन्हें मात्र 2,700 रुपए दिए जा रहे
वर्करों का आरोप है कि केंद्र सरकार की 60:40 के अनुपात वाली योजना के तहत उन्हें मात्र 2,700 रुपए दिए जा रहे हैं। इतने कम मानदेय के बावजूद उनसे नशा मुक्ति मुहिम, ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ और अन्य कई सरकारी योजनाओं के तहत अतिरिक्त काम करवाया जा रहा है।
वर्करों की पेंशन काटने के आदेश जारी कर दिए
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गलत पेंशन भुगतान का हवाला देकर वर्करों की पेंशन काटने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके अलावा आवाज उठाने पर वर्करों के खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन पर लाठीचार्ज तक किया गया। इस संकट की घड़ी में किसी भी सुपरवाइजर या सीडीपीओ ने उनकी मदद नहीं की।


35 साल से सेवा दे रहे कर्मचारियों को लाभ नहीं
प्रदर्शनकारी वर्करों ने कहा कि 35 साल से सेवा दे रहे कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है। सरकारी काम अब एनजीओ (NGOs) को सौंपे जा रहे हैं। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में सत्ता में आने का सपना देखने वाली भाजपा यह भूल जाए कि उसे यहां सफलता मिलेगी। अपनी मांगों की अनदेखी के विरोध में 1 और 2 दिसंबर को बड़े स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। मांगें न माने जाने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

