अमृतपाल की पार्टी का बड़ा दांव : पपलप्रीत को बनाया उम्मीदवार, जेल में बंद सांसद का करीबी रहा है साथ

मजीठा (अमृतसर) असम जेल में बंद खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह के संगठन अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए एक और उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है। संगठन ने शुक्रवार को मजीठा विधानसभा सीट से पपलप्रीत सिंह को उम्मीदवार बनाया। पपलप्रीत जेल में बंद खडूर साहिब सांसद अमृतपाल सिंह के प्रमुख सहयोगी और उनके मीडिया सलाहकार रहे हैं।

संगठन ने कुछ दिन पहले बासी पठाना सीट से सतवंत सिंह को उम्मीदवार घोषित किया था। सतवंत सिंह, केहर सिंह के बेटे हैं। केहर सिंह को 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में फांसी दी गई थी।

NSA के तहत जेल में बंद हैं पपलप्रीत

पपलप्रीत फिलहाल गोइंदवाल साहिब जेल, तरनतारन में बंद हैं। उन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल से पंजाब वापस लाया गया था। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था। पपलप्रीत पर 2023 में अजनाला पुलिस थाने पर हुए हमले समेत कई मामलों में मुकदमे चल रहे हैं। अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह, जो वारिस पंजाब दे के प्रमुख हैं, शुक्रवार देर रात अपनी पत्नी बलविंदर कौर के साथ अमृतसर स्थित पपलप्रीत के घर पहुंचे और उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की।

अमृतपाल के साथ पपलप्रीत सिंह। फरारी के दौरान उनकी बाइक पर जाते और बाइक रेहड़े पर रखकर ले जाते हुए कई फोटो वायरल हुईं थी।- फाइल फोटो
अमृतपाल के साथ पपलप्रीत सिंह। फरारी के दौरान उनकी बाइक पर जाते और बाइक रेहड़े पर रखकर ले जाते हुए कई फोटो वायरल हुईं थी।- फाइल फोटो

पपलप्रीत के बारे में जानिए…

कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर चुके हैं पपलप्रीत

41 वर्षीय पपलप्रीत सिंह के पास कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा है। उन्होंने तीन साल का पॉलिटेक्निक डिप्लोमा भी किया है। अजनाला पुलिस थाने पर हमले के बाद पंजाब पुलिस की कार्रवाई के दौरान पपलप्रीत और अमृतपाल के एक साथ भागते हुए फोटो सामने आने के बाद वे चर्चा में आए थे। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर अमृतपाल के साथ डिब्रूगढ़ जेल में NSA के तहत हिरासत में रखा गया। पपलप्रीत ने खुद को वीडियो जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट बताया था। बाद में वे अमृतपाल के मीडिया सलाहकार के तौर पर सामने आए।

पपलप्रीत पर 2015 में भी केस दर्ज हुआ था

पपलप्रीत का कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ विवाद 2015 में भी सामने आया था। उस समय उन्हें सरबत खालसा के आयोजकों के साथ कथित तौर पर ISI से संबंध रखने के आरोप में देशद्रोह के मामले का सामना करना पड़ा था। उस समय पंजाब में SAD-BJP गठबंधन की सरकार थी।

उनके खिलाफ IPC की धाराओं 124A, 153-A, 153-B, 115, 117 और 120-B, UAPA की धारा 13(1) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-F के तहत FIR दर्ज की गई थी। FIR में आरोप था कि सरबत खालसा के एक जमावड़े में पपलप्रीत ने बब्बर खालसा से जुड़े नारायण सिंह चौड़ा और जगतार सिंह हवारा को लेकर भड़काऊ संदेश पढ़कर सुनाया था।

हवारा को अकाल तख्त का जत्थेदार नियुक्त किए जाने की बात भी उस संदेश में कही गई थी। नारायण सिंह चौड़ा ने 4 दिसंबर 2024 को स्वर्ण मंदिर के बाहर धार्मिक सजा के तौर पर सेवा कर रहे SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर कथित तौर पर गोली चलाई थी।

2016 में फिर हुई थी गिरफ्तारी

पपलप्रीत को 2016 में फिर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने सरबत खालसा के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें बठिंडा के तख्त दमदमा साहिब में दूसरा सरबत खालसा आयोजित करने के प्रयास से रोका था। इसके बाद 2019 में उन्होंने कथित तौर पर ड्रग तस्करों के खिलाफ अभियान भी चलाया। बाद में वे वारिस पंजाब दे के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। पपलप्रीत ने 2015 में सिख यूथ फ्रंट नाम का संगठन बनाया था। उनका शिरोमणि अकाली दल के साथ भी कुछ समय का जुड़ाव रहा था।

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