फिलहाल के लिए दोनों मामलों में पंजाब सरकार के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को 1 दिसंबर तक लिक्विडेशन प्लान का ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं।वहीं, मुलाजिमों को 31 मार्च 2027 तक किए जाने वाले भुगतान को लेकर पंजाब सरकार से जानकारी मांगी गई है।
हाईकोर्ट के फैसलों का अध्ययन कर फैसला लिया
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने गुरुवार (5 नवंबर) को मामले में सुनवाई करते हुए कहा उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 12 अक्टूबर 2026 और 30 अक्टूबर 2026 के आदेशों का अध्ययन किया है। बाद के आदेश में पंजाब के मुख्य सचिव को आपराधिक अवमानना मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए थे।
पीठ ने कहा कि उसे दोनों पक्षों के बीच विवाद की पृष्ठभूमि से भी अवगत कराया गया है। इसके बाद कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की आगे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अवमानना मामले में भी पंजाब सरकार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं।
HC के फैसले को SC में चुनौती दी थी
हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की लंबित किस्तें तत्काल जारी करे। ये किस्तें पंजाब में तैनात अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS और IFS) के अधिकारियों को दिए जा रहे समान दरों पर जारी करने के आदेश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया भुगतान नहीं हो जाता, तब तक सरकार प्रिंट और सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे गैर-जरूरी खर्च नहीं करेगी।हाईकोर्ट के आदेश को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वहीं, हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर सरकार के खिलाफ सिविल और आपराधिक अवमानना की याचिकाएं दायर की गई थीं।
SC बोला- सरकार अगली सुनवाई पर DA भुगतान का पूरा प्लान दे
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया DA के भुगतान को लेकर मार्च 2027 तक का प्लान तैयार करने को कहा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बताया कि फिलहाल DA 53% की दर से दिया जा रहा है। साथ ही सरकार से पूछा कि वह बकाया राशि में से कितना भुगतान करने को तैयार है? कोर्ट ने कहा कि सरकार को फिलहाल राहत मिली है, इसलिए अगली सुनवाई पर सकारात्मक जवाब लेकर आए। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों पर टिप्पणी की
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि असंगठित क्षेत्र और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वालों के मुकाबले सरकारी कर्मचारियों को ज्यादा सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन उनके काम की जवाबदेही तय नहीं होती। कोर्ट ने यहां तक कहा कि सरकारी कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाना चाहिए, तभी उनकी जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।
कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्मचारी हाईकोर्ट और जिला अदालतों में भर्ती होते हैं, लेकिन बाद में सचिवालय पहुंच जाते हैं। वहां एक दिन में सिर्फ तीन पेज टाइप किए जाते हैं। अगर सरकारी कर्मचारी ईमानदारी से काम करें तो देश में मुकदमों की संख्या कम हो सकती है। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को पेंशन मिलती रहती है, लेकिन कर्मचारियों की जवाबदेही कहां है?

