नई दिल्ली: लोकसभा ने मंगलवार को ‘केरल (नाम में परिवर्तन) विधेयक, 2026’ (Kerala Alteration of Name Bill, 2026) को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के जरिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि जून 2024 में केरल विधानसभा द्वारा इस संबंध में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से यह बदलाव करने का अनुरोध किया गया था। विधेयक पर बोलते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि मलयालम भाषा में राज्य का वास्तविक नाम ‘केरलम’ ही है, जबकि संविधान में यह ‘केरल’ दर्ज था। इसी विसंगति को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस वर्ष फरवरी में प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। चर्चा के दौरान नित्यानंद राय ने केरल से कांग्रेस सांसदों के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसे राज्य का नाम ‘केरलम’ किए जाने पर कोई आपत्ति क्यों है।
इसके साथ ही, लोकसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच ‘राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026’ (NCDC Amendment Bill, 2026) को भी पारित कर दिया। सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा पेश किया गया यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करता है। इस कानून के तहत एनसीडीसी को औद्योगिक वस्तुओं (Industrial Goods) के क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, राज्य सरकारें अब विकास निगम से मिलने वाले कोष को सहकारिता विकास में लगी किसी भी इकाई तक पहुंचा सकेंगी तथा निगम स्वयं भी किसी सहकारी समिति को सीधे ऋण या अनुदान दे सकेगा। विधेयक के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि 1963 में अपनी स्थापना के बाद से एनसीडीसी ने सहकारिता के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1963 से 2014 तक पूर्ववर्ती सरकारों ने निगम के जरिए लगभग 45,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की थी, जबकि वर्ष 2014 के बाद पिछले 11 वर्षों में यह सहायता बढ़कर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना विस्तृत चर्चा के पास कर दिया गया। दिन का विधायी कार्य पूरा होने के बाद निचले सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।

