भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह, दुलार और विश्वास का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन

सिद्ध बगलामुखी धाम के संस्थापक नवजीत भारद्वाज
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धर्म डेस्क/  हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार, भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह, दुलार और विश्वास का प्रतीक पर्व है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उसके जीवन की सुख, समृद्धि और लंबी आयु का कामना करती हैं। वहीं भाई बहन को उपहार देते हुए जीवनभर उसके हर परिस्थिति में साथ देने का वचन देता है। इस बार रक्षाबंधन की तिथि, ग्रहण और भद्रा को लेकर संशय बना हुआ है।   सिद्ध बगलामुखी धाम के संस्थापक नवजीत भारद्वाज जी ने बताया कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानिए तिथि और धार्मिक महत्व

रक्षाबंधन तिथि 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर होगी और समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पवित्र पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।

रक्षा बंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 

पंचांग के अनुसार साल 2026 में राखी बांधने का सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

रक्षाबंधन पर भद्राकाल का समय 

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इस बार राखी बांधने में भद्राकाल का साया नहीं रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, भद्रा 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर  8 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 32 मिनट तक रहेगी, फिर इसके बाद वह समाप्त हो जाएगी। इस तरह से 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व 

धार्मिक नजरिए से हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। जिसमें बहनें अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं। हिंदू धर्म मं रक्षासूत्र को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन विधि-विधान के साथ कलाई में रक्षासूत्र बांधने से सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। रक्षाबंधन का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी कथा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से निकल रहे हैं खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का एक टुकड़ा बांधा था। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन निभाया था।

डिस्क्लेमर : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अखंड केसरी उत्तरदायी नहीं है।

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