CM की मीटिंग को लेकर AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एक वीडियो भी जारी किया। इसमें कहा गया कि आने वाले एक हफ्ते में पंजाब में नशे के खिलाफ बड़ा बदलाव दिखने वाला है। पन्नू ने साफ किया कि सरकार नशे को लेकर कड़ा और बड़ा फैसला ले सकती है।
विरोधी पार्टियां कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल सहित वारिस पंजाब दे के नेता लगातार सरकार को नशे के मुद्दे पर घेर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि 2025 से चल रही पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ मुहिम का अभी तक ग्राउंड पर कोई असर देखने को नहीं मिला है। झोटा मर्डर के बाद सरकार के मंत्री भी नशे को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। सरकार के खिलाफ उठ रहे विरोध के बीच अब CM ने सीधे कमान संभाली है।

1 मार्च 2025 को शुरू हुआ था युद्ध नशे विरुद्ध
पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ मुहिम 1 मार्च 2025 को CM भगवंत मान के निर्देश पर शुरू हुई थी। यह नशा तस्करी के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस वाला तलाशी अभियान है। 15 अक्टूबर 2026 तक इस मुहिम के लगभग 592 दिन पूरे हो चुके हैं।
इसके तहत पंजाब के सभी 23 जिलों के पुलिस प्रमुख नशे की सूचना पर रेड करते हैं। वे इसे अपने इंस्टाग्राम और एक्स हैंडल पर प्रमोट करते हैं और नशे के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाइयों, जिनमें तस्करों की गिरफ्तारी व घर गिराने की कार्रवाई शामिल है, को दिखाते हैं।
सरकार का दावा- बड़ी मात्रा में नशा पकड़ा
सरकार और पुलिस के दावों के अनुसार अक्टूबर 2026 तक 85 हजार से ज्यादा नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। करीब 64 हजार FIR दर्ज की जा चुकी हैं। मुहिम में लगभग 4,200 किलो हेरोइन और 980 किलो अफीम बरामद की गई है। इसके अलावा भुक्की, गांजा, ICE, लाखों नशीली गोलियां और कैप्सूल तथा 20 करोड़ रुपए की ड्रग मनी बरामद की गई है। नशे की कमाई से बने मकानों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी हुई है।

