खनौरी बॉर्डर में सड़क पर बिस्तर बिछाकर डटे किसान, शांतिपूर्ण दिल्ली मार्च की अपील

चंडीगढ़- पंजाब और हरियाणा की सीमा पर स्थित खनौरी बॉर्डर पर एक बार फिर किसान आंदोलन की तपिश बढ़ गई है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के बैनर तले किसानों ने 228 किलोमीटर लंबी ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ शुरू की है।  यह जत्था पंजाब से निकलकर दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहा था, लेकिन जींद के दाता सिंह वाला-खनौरी चेकपॉइंट पर हरियाणा पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कड़े अवरोधक लगाकर किसानों के रास्ते को पूरी तरह रोक दिया।

​भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और एमएसपी गारंटी का विरोध

किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस नए आंदोलन का मुख्य कारण प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता है। किसानों को आशंका है कि यदि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को इस समझौते के दायरे में लाया गया तो विदेशी उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

बीकेयू एकता सिद्धूपुर के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि देश के किसानों के अस्तित्व को बचाने के लिए एमएसपी का पक्का कानून बनवाना और कृषि को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों के दबाव से मुक्त रखना बेहद जरूरी है।

​खनौरी बॉर्डर पर किसानों ने सड़क पर काटी रात

रविवार शाम जब पुलिस ने किसानों को हरियाणा सीमा में प्रवेश करने से रोका, तो प्रदर्शनकारी किसानों के जत्थे ने मुख्य मार्ग पर ही अपने बिस्तर बिछा लिए और रात खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे बिताई। किसानों का कहना है कि वे बिना किसी ट्रैक्टर-ट्रॉली के केवल 51 किसानों के सीमित जत्थे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से पैदल दिल्ली जा रहे हैं, फिर भी सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार को छीन रही है।

हरियाणा पुलिस की भारी बैरिकेडिंग और जींद में धारा 163 लागू

किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा पुलिस और जींद जिला प्रशासन ने नरवाना नहर पुल और खनौरी सीमा पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। सीमा पर कंक्रीट के बड़े बोल्डर, लोहे के बैरिकेड्स, कटीले तार, वाटर कैनन और वज्र वाहन तैनात किए गए हैं।

जींद प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू करते हुए किसी भी प्रकार के सार्वजनिक जमावड़े और बिना अनुमति मार्च निकालने पर रोक लगा दी है।

​29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर महापंचायत की तैयारी

किसान नेताओं के अनुसार, 16 अगस्त से शुरू हुई यह पदयात्रा अलग-अलग पड़ावों से होते हुए 29 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पहुंचने के लिए निर्धारित की गई है, जहां एक विशाल किसान पंचायत का आयोजन किया जाना है। स्थानीय प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद किसान नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा शांतिपूर्ण आवागमन का मार्ग खोलने की अपील की है।

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