जालंधर। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली पत्थर चौथ, जिसे कलंक चतुर्थी, गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, इस वर्ष 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचने की परंपरा है। माना जाता है कि गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर मिथ्या कलंक लगने की आशंका रहती है।
भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व
पत्थर चौथ के अवसर पर श्रद्धालु भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। गणपति को दूर्वा, मोदक और लड्डुओं का भोग लगाकर सुख-समृद्धि तथा विघ्नों के निवारण की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक कथाओं में चंद्रमा और भगवान गणेश से जुड़ी घटना के कारण इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता प्रचलित हुई।
चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि यदि भूलवश इस दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो व्यक्ति को अनावश्यक आरोप या मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में भगवान गणेश का स्मरण, पूजा तथा संबंधित धार्मिक उपाय करने की परंपरा बताई गई है।
अलग-अलग क्षेत्रों में अलग मान्यता
कुछ क्षेत्रों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जिसे बहुला चौथ या संकष्टी चौथ भी कहा जाता है, को भी पत्थर चौथ अथवा कलंक चौथ के रूप में माना जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि 31 अगस्त को थी। हालांकि व्यापक रूप से पत्थर चौथ का संबंध भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी यानी गणेश चतुर्थी से ही माना जाता है।
धार्मिक आस्था का संदेश यही है कि गणपति बप्पा की आराधना के साथ मन में श्रद्धा, संयम और सकारात्मकता बनाए रखें।
