जालंधर: बच्चों के सुरक्षित भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रोजेक्ट ‘जीवनज्योत-2: सेव द चाइल्डहुड’ के अंतर्गत बाल भिक्षा रोकू टास्क फोर्स ने शहर में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। इस विशेष अभियान का नेतृत्व लीगल-कम-प्रोबेशन अधिकारी संदीप कुमार, सोशल वर्कर रेनू बाला, आउटरीच वर्कर गौरव और चाइल्डलाइन सुपरवाइजर बब्बलजीत की संयुक्त टीम ने किया। जिला प्रोग्राम अधिकारी गुलबहार सिंह एवं जिला बाल सुरक्षा अधिकारी अजय भारती के कड़े दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए टीम ने शहर के भीड़भाड़ वाले मुख्य चौराहों और संवेदनशील इलाकों की गहन पड़ताल की। इसी क्रम में टास्क फोर्स ने कपूरथला चौक पर बाल भिक्षावृत्ति में लिप्त एक नाबालिग बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
रेस्क्यू अभियान की प्रक्रिया के तहत बच्ची का औपचारिक डीडीआर (दैनिक डायरी रिपोर्ट) दर्ज करवाने के बाद उसे बाल कल्याण समिति (CWC), जालंधर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेशानुसार बच्ची की सुरक्षा, देखभाल और उचित संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उसे तुरंत ‘चिल्ड्रन होम फॉर गर्ल्स’ भेज दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्ची की काउंसलिंग, उचित देखरेख, स्कूली शिक्षा और संपूर्ण पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करेगा ताकि वह एक सामान्य और गरिमापूर्ण जीवन जी सके।
छापेमारी के दौरान टास्क फोर्स के सदस्यों ने आम नागरिकों, दुकानदारों और राहगीरों को बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति, शारीरिक-यौन शोषण और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया। अधिकारियों ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि बाल भिक्षा एक सामाजिक अभिशाप है और बच्चों का वास्तविक स्थान सड़कों पर भीख मांगना नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करना है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि यदि कहीं भी कोई बच्चा संकट में दिखे या भीख मांगता नजर आए, तो उसकी सूचना तत्काल टोल-फ्री चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें या गांधी वनीता आश्रम स्थित जिला प्रोग्राम अधिकारी अथवा जिला बाल सुरक्षा अधिकारी के कार्यालय में संपर्क करें, ताकि संकटग्रस्त बच्चों को समय रहते नई जिंदगी दी जा सके।
