लोको पायलट और सहायक लोको पायलट से लेकर ट्रेन मैनेजर, टिकट परीक्षक और ऑन-बोर्ड कैटरिंग स्टाफ तक, यात्रा के हर पहलू को महिलाओं ने ही संभाला। यह पहल न केवल भारतीय रेलवे में महिलाओं की ताकत, समर्पण और नेतृत्व का जश्न मनाती है, बल्कि इस क्षेत्र में अधिक लैंगिक प्रतिनिधित्व के लिए एक शक्तिशाली मिसाल भी स्थापित करती है।
भारतीय रेलवे के लिए आठ मार्च 2025 का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसी घटना घटी है जो बेहद खास है। देश में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन पूरी तरह से महिला चालक दल द्वारा किया गया। यह ऐतिहासिक यात्रा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हुई, जिसमें ट्रेन संख्या 22223 सीएसएमटी – साईंनगर शिरडी वंदे भारत एक्सप्रेस छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से सुबह 6.20 बजे रवाना हुई।
ट्रेन का संचालन एशिया की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव और सहायक लोको पायलट संगीता कुमारी ने किया। ट्रेन के संचालन की देखरेख श्वेता घोणे ने की। महिला ट्रैवलिंग टिकट परीक्षकों (टीटीई) की एक समर्पित टीम तैनात की गई थी, जिसमें हेड टिकट परीक्षक अनुष्का केपी और एमजे राजपूत के साथ-साथ वरिष्ठ टिकट परीक्षक सारिका ओझा, सुवर्णा पश्ते, कविता मराल और मनीषा राम शामिल थीं।
लोको पायलट और सहायक लोको पायलट से लेकर ट्रेन मैनेजर, टिकट परीक्षक और ऑन-बोर्ड कैटरिंग स्टाफ तक, यात्रा के हर पहलू को महिलाओं ने ही संभाला। यह पहल न केवल भारतीय रेलवे में महिलाओं की ताकत, समर्पण और नेतृत्व का जश्न मनाती है, बल्कि इस क्षेत्र में अधिक लैंगिक प्रतिनिधित्व के लिए एक शक्तिशाली मिसाल भी स्थापित करती है।
रेलवे अधिकारियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह पहल महिलाओं को सशक्त बनाने और अधिक समावेशी रोजगार के अवसर पैदा करने की भारतीय रेलवे की व्यापक प्रतिबद्धता के अनुरूप है। अपनी गति, दक्षता और आधुनिक सुविधाओं के लिए जानी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ने पहले ही भारत में रेल यात्रा में क्रांति ला दी है। यह ऐतिहासिक यात्रा पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में लैंगिक बाधाओं को तोड़ने में की जा रही प्रगति को और भी रेखांकित करती है।


