अखंड केसरी ब्यूरो:- पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री को दो पत्र लिखे थे, लेकिन मुझे उनसे कोई उत्तर नहीं मिला, बल्कि मुझे महिला एवं बाल विकास मंत्री से उत्तर मिला। लेकिन मैंने उनके उत्तर का भी जवाब दिया और प्रधानमंत्री को सूचित किया। जब चुनावों से पहले न्याय संहिता विधेयक को जल्दबाजी में पास किया गया, तो मैंने कहा था कि इसे इतनी जल्दी पास नहीं किया जाना चाहिए, इसमें राज्यों से परामर्श नहीं लिया गया था। मैंने कई बार इसका विरोध किया क्योंकि इस संबंध में राज्यों से कोई सलाह नहीं ली गई थी। इसे राज्यसभा, विपक्ष और सभी दलों के साथ चर्चा के बाद पास किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसी कारण आज हम इस विधेयक को ला रहे हैं…”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों की भागीदारी के बिना महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने का निर्णय उचित नहीं है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत सही ढंग से करना चाहिए था। ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सूचित करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन उन्हें प्रत्यक्ष जवाब नहीं मिला, जिससे उनका असंतोष बढ़ा। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की नीति और कार्यशैली पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।


