Tata Group: उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार (9 अक्टूबर) की रात को मुंबई के हॉस्पिटल में निधन हो गया था। 86 वर्षीय रतन टाटा, 2012 में टाटा सन्स से रिटायरमेंट के बाद टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन बने थे।
एन. चंद्रशेखरन बने रहेंगे टाटा सन्स के चेयरमैन
नोएल टाटा धीरे-धीरे टाटा ट्रस्ट्स में अहम भूमिकाओं की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। वह वर्तमान में सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट दोनों के ट्रस्टी हैं, जो टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख घटक हैं। पिछले कुछ सालों में उनकी बढ़ती भागीदारी को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट्स की देखरेख के लिए संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था, जिस पर आज मुहर लग गई। वर्तमान में एन. चंद्रशेखरन टाटा सन्स के चेयरमैन हैं और उसका नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन अब फोकस ट्रस्ट्स की लीडरशिप पर है, जिसे रतन टाटा ने 2012 में टाटा सन्स से रिटायरमेंट के बाद संभाला था।
अभी टाटा ग्रुप की इन कंपनियों की जिम्मेदारी संभास रहे नोएल
- टाटा ग्रुप के साथ 4 दशक से जुड़े नोएल टाटा अभी टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के चेयरमैन हैं। वे ट्रेंट, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों के चेयरमैन हैं और टाटा स्टील और टाइटन कंपनी लिमिटेड के वाइस-चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं।
- नोएल टाटा का मिस्त्री परिवार के साथ रिश्ता भी अहम फैक्टर है, क्योंकि उनकी शादी साइरस मिस्त्री की बहन से हुई है। मिस्त्री परिवार के पास टाटा सन्स में 18% हिस्सेदारी है, जो टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व के फैसलों में काफी प्रभाव बनाए रखता है।
2012 में रिटायरमेंट के बाद रतन टाटा बने थे ट्रस्ट्स के चेयरमैन
रतन टाटा का टाटा ट्रस्ट्स में कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा। टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटने के बाद भी उनका ट्रस्ट्स पर प्रभाव बना रहा, जिससे साइरस मिस्त्री के कार्यकाल के दौरान खींचतान भरा माहौल बना। अब नोएल टाटा को ट्रस्ट्स का प्रमुख बनाया जाना एक नया मोड़ है और शायद टाटा समूह के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे में भी कुछ बदलाव संभव है। टाटा ग्रुप दुनिया के 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है और ग्लोबल ऑपरेशन से 165 बिलियन डॉलर से ज्यादा रेवेन्यू जनरेट करता है।


