अखंड केसरी ब्यूरो :-हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार पर कांग्रेस पार्टी का चिंतन जारी है। दूसरे दिन भी शिमला कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस के शीर्ष नेता और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य, पीएल पुनिया और रजनी पाटिल, मंथन कर रहे हैं। कांगड़ा और शिमला संसदीय क्षेत्र के पार्टी प्रत्याशियों, विधायकों, जिला और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों से वन टू वन बातचीत कर हार के कारणों की समीक्षा की जा रही है। इन चर्चाओं के बाद, एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपा जाएगा।
हिमाचल की चारों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस की हार
कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी हिमाचल की चारों लोकसभा सीटों में हार के कारणों का विश्लेषण कर रही है। आज कांगड़ा और शिमला संसदीय क्षेत्र के नेताओं ने हार के पीछे कई कारण बताए, जिनमें सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी, टिकट आवंटन में देरी, पार्टी नेताओं की अनदेखी, बेलगाम अफसरशाही, मोदी फैक्टर, और राम मंदिर जैसे मुद्दे शामिल हैं। कमेटी के सदस्य, पीएल पुनिया और रजनी पाटिल, इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर पार्टी हाईकमान को सौंपेंगे।
मंडी और हमीरपुर में कांग्रेस की हार के कारण
बीते रोज हुई चर्चा के बारे में जानकारी देते हुए रजनी पाटिल और पीएल पुनिया ने बताया कि मंडी और हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के नेताओं ने हार के पीछे कई महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर इशारा किया है। नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर समन्वय की कमी, समय पर टिकट नहीं मिलने, और शीर्ष नेताओं की अनदेखी जैसी समस्याएं हार का प्रमुख कारण बनीं। इसके अलावा, मोदी फैक्टर और राम मंदिर जैसे मुद्दों ने भी चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डाला। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही आलाकमान को सौंपा जाएगा।
हिमाचल में कांग्रेस की चारों लोकसभा सीटों पर हार
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की चारों लोकसभा सीटों पर हार ने पार्टी नेतृत्व को गहरे सोच में डाल दिया है। कांग्रेस हाईकमान और इंडी गठबंधन को उम्मीद थी कि हिमाचल में सत्तारूढ़ कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता आशा कुमारी ने कहा कि कांगड़ा-चंबा से मजबूत कांग्रेस प्रत्याशी उतारा गया था, लेकिन अन्य क्षेत्रों में प्रत्याशियों का सही समय पर चयन नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं को काम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। आशा कुमारी ने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रत्याशी घोषित किए जाते तो परिणाम अलग हो सकते थे।


