वायनाड में भूस्खलन से 200 से ज्यादा लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी,

वायनाड

नई दिल्ली, 1 अगस्त: केरल के वायनाड जिले में आई भूस्खलन की त्रासदी ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस घटना में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने तुरंत ही राहत और बचाव कार्य शुरू करने का आदेश दिया था। NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) के DIG मोहसिन शाहिदी ने मीडिया को बताया कि राहत कार्य तेजी से जारी है और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।DIG शाहिदी ने बताया कि घटना के पहले ही दिन राहत दलों ने 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सफलता प्राप्त की थी। उन्होंने यह भी बताया कि राहत कार्य में सेना, NDRF, और राज्य पुलिस की टीमें मिलकर काम कर रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष हेलीकॉप्टरों और ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, भूस्खलन के कारण संचार और परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।भूस्खलन के कारण एक प्रमुख पुल टूट गया था, जो राहत और बचाव कार्य में एक बड़ी बाधा बन गया था। DIG शाहिदी ने बताया कि इस पुल की मरम्मत का काम तेजी से जारी है और इसके अलावा, अस्थायी रूप से एक मिनी ब्रिज भी बनाया गया है, ताकि राहत सामग्री और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकें।

वायनाड जिले के कई गांवों को तहस-नहस

राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस भूस्खलन ने वायनाड जिले के कई गांवों को तहस-नहस कर दिया है, और सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। DIG शाहिदी ने यह भी बताया कि लापता लोगों की खोज के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार ने वायनाड को ‘डिसास्टर जोन’ घोषित कर दिया है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित वायनाड जिला पहाड़ी इलाका है, और इस क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण यहां भूस्खलन की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और प्रशासन द्वारा पहाड़ी इलाकों में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए दीर्घकालिक समाधान की योजना बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

 

DIG शाहिदी ने अपने बयान में यह भी कहा कि राहत और बचाव कार्य पूरा होने तक इलाके को पूरी तरह से खाली करवाया जाएगा और इसके बाद ही स्थानीय लोगों को वापस जाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा दी जा रही जानकारी पर विश्वास करें।

 

इस घटना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है और कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। इसके साथ ही, केरल के मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और सरकार के साथ सहयोग करें, ताकि जल्द से जल्द इस संकट से निपटा जा सके।

 

वायनाड में राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है, और प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके। हालांकि, आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति के बारे में कोई भी अनिश्चितता इस राहत कार्य को प्रभावित कर सकती है। लिहाजा, सभी संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरी कदम उठा रही हैं।

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