PIB NEWS :- 9 अगस्त 2024 को पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) चंडीगढ़ और जालंधर द्वारा राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला के सेमिनार हॉल में ‘वार्तालाप’ नामक एक महत्वपूर्ण मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य तीन नए आपराधिक कानूनों और पत्रकारिता की नैतिकता पर चर्चा करना था। कार्यशाला में पटियाला जिले के कई वरिष्ठ पत्रकारों, राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों और कानून विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर, पीआईबी चंडीगढ़ के सहायक निदेशक श्री अनुभव डिमरी ने अतिथियों का स्वागत किया और भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की विभिन्न मीडिया इकाइयों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने पीआईबी के कार्यों और उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए मीडिया के साथ समन्वय बढ़ाना कितना आवश्यक है।
ऑफ लॉ, पटियाला ने तीन नए आपराधिक कानूनों की ऐतिहासिक
कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) जय एस. सिंह, कुलपति, राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला ने तीन नए आपराधिक कानूनों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये नए कानून समय की आवश्यकताओं और सामाजिक परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। प्रो. (डॉ.) आनंद पवार, रजिस्ट्रार, राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला ने नए कानूनों की प्रासंगिकता और पुराने कानूनों की सीमाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने नए कानूनों में शामिल किए गए कई नए अपराधों का जिक्र किया, जो पुराने कानूनों में नहीं थे, और इस बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित किया।
डिजिटल युग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के संशोधनों पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से लागू इस अधिनियम में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई है, जो डिजिटल युग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत पहली बार इलेक्ट्रॉनिक एफआईआर का प्रावधान किया गया है, जो न्याय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाएगा। प्रोफेसर डॉ. शरणजीत ने भारतीय दंड संहिता में किए गए संशोधनों पर चर्चा की, जिसमें नए अपराधों और जुर्माने की रकम में वृद्धि के प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए सख्त प्रावधानों की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारतीय प्रेस परिषद द्वारा जारी नैतिक सिद्धांतों की महत्ता पर बल दिया
पत्रकारिता की नैतिकता पर अपने विचार साझा करते हुए, डॉ. हरजिंदर वालिया, पूर्व प्रमुख, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला ने भारतीय प्रेस परिषद द्वारा जारी नैतिक सिद्धांतों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता, सत्यता और तथ्यपरकता पत्रकारिता के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और इन्हें बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि जनता का मीडिया पर विश्वास बना रहे।
इस अवसर पर, डॉ. विक्रम सिंह, मीडिया और संचार अधिकारी, पीआईबी, जालंधर ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। प्रो. (डॉ.) नरेश वत्स, डीन अकादमिक मामले भी इस अवसर पर उपस्थित थे। केंद्रीय संचार ब्यूरो, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित फोटो प्रदर्शनी ने नए आपराधिक कानूनों के बारे में जानकारी दी, जिसने कार्यशाला में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यशाला के अंत में, पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का विशेषज्ञों ने संतोषजनक उत्तर दिया। यह कार्यशाला न केवल नए कानूनों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक रही, बल्कि इसमें भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों के लिए एक महत्वपूर्ण और शिक्षाप्रद अनुभव भी साबित हुई।


