अखंड केसरी ब्यूरो :- वाराणसी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ रहा है, जिससे शहर के निवासी और प्रशासन दोनों चिंतित हैं। गंगा का रौद्र रूप एक बार फिर सामने आ रहा है। पिछले एक हफ्ते से जलस्तर स्थिर बना हुआ था, लेकिन अब पिछले तीन दिनों में यह तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते जलस्तर के कारण वाराणसी के 84 घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। यह घाट, जो कभी सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र हुआ करते थे, अब पानी में डूब चुके हैं। यहां तक कि मां गंगा की दैनिक आरती के स्थान को भी बदलना पड़ा है, क्योंकि जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है।
वाराणसी प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर
मां गंगा चेतावनी बिंदु से केवल 5 मीटर नीचे बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में भय व्याप्त है। लोग डर रहे हैं कि कहीं जलस्तर और न बढ़ जाए और उनके घरों को भी पानी न घेर ले। प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें लगातार घाटों पर तैनात हैं और बढ़ते जलस्तर पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
वाराणसी में एनडीआरएफ की मेडिकल टीम भी सक्रिय
एनडीआरएफ की 11 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट नवीन कुमार ने बताया कि उनकी टीम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम 24 घंटे घाटों पर तैनात है और लोगों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। लोग नहाने के लिए गंगा के बीच में न जाएं, इसके लिए भी टीम जागरूकता फैला रही है। नवीन कुमार ने यह भी बताया कि एनडीआरएफ की मेडिकल टीम भी सक्रिय है, जो किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का तुरंत उपचार करने के लिए तैयार है।
स्थानीय निवासी प्यारेलाल, जो वर्षों से गंगा के तट पर रह रहे हैं, ने कहा कि गंगा के बढ़ते जलस्तर ने शवदाह की प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि शवदाह के लिए जो प्लेटफार्म बनाए गए थे, वे जलमग्न हो चुके हैं। अब शवदाह घाट के किनारे स्थित सीढ़ियों पर या उससे ऊपर की ओर किया जा रहा है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से शहर में हालात गंभीर हो गए हैं। निचले इलाकों के लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, एनडीआरएफ की टीम लगातार पानी की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद के लिए तैयार है।
गंगा का बढ़ता जलस्तर न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह शहर के जनजीवन को भी अस्त-व्यस्त कर रहा है। प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम की सतर्कता और तत्परता से अब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है, लेकिन भविष्य में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका के कारण स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी हो रही है कि अगर जलस्तर में तेजी से वृद्धि जारी रहती है, तो इससे न केवल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी, बल्कि यह शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इस बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर से इस मुद्दे को सामने ला दिया है कि वाराणसी जैसे शहरों में जल प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा के उपायों की कितनी आवश्यकता है।
गंगा का जलस्तर अगर इसी तरह बढ़ता रहा, तो प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। वाराणसी के लोग इस समय मां गंगा की आराधना कर रहे हैं कि जलस्तर जल्द से जल्द सामान्य हो जाए और उनकी जिंदगी वापस पटरी पर लौट सके। हालांकि, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम पूरी तरह से मुस्तैद है, लेकिन यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में जलस्तर में कमी आती है या यह और गंभीर रूप धारण करता है।


