विधानसभा में भाजपा विधायकों का धरना: मुख्यमंत्री से जवाब न मिलने पर पूरी रात सदन में गुजारी

विधानसभा में भाजपा विधायकों

अखंड केसरी ब्यूरो रांची: झारखंड की राजनीति में एक अनोखा और अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में पूरी रात गुजारी। यह घटनाक्रम बुधवार को विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन शुरू हुआ, जब भाजपा विधायकों ने अनुबंध कर्मियों के स्थाईकरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जवाब की मांग की। सदन में इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया न मिलने के कारण भाजपा विधायकों ने यह निर्णय लिया कि जब तक मुख्यमंत्री इस पर जवाब नहीं देते, वे सदन से बाहर नहीं जाएंगे।

विधानसभा कर्मियों के स्थाईकरण का मुद्दा बेहद गंभीर

इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत उस समय हुई जब भाजपा विधायकों ने सदन के भीतर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। उनका आरोप था कि अनुबंध कर्मियों के स्थाईकरण का मुद्दा बेहद गंभीर है और इसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। विधायकों का कहना था कि राज्य सरकार को इस पर स्पष्ट और ठोस नीति अपनानी चाहिए ताकि उन लाखों अनुबंध कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके जो वर्षों से अपने स्थाईकरण की मांग कर रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से इस मुद्दे पर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने के कारण भाजपा विधायकों ने यह निर्णय लिया कि वे सदन से बाहर नहीं जाएंगे और वहीं डटे रहेंगे।

इस कदम ने विधानसभा परिसर में एक अलग ही माहौल पैदा कर दिया

शाम होते-होते सदन की कार्रवाई को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया, लेकिन भाजपा विधायकों ने सदन के भीतर ही रहने का निश्चय किया। उनके इस कदम ने विधानसभा परिसर में एक अलग ही माहौल पैदा कर दिया। भाजपा विधायकों ने सदन के भीतर फर्श पर बैठकर रात गुजारने का निर्णय लिया। हालांकि, रात के दौरान सदन के भीतर बिजली भी काट दी गई, लेकिन इसके बावजूद विधायक डटे रहे और उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

सभी विधायकों का मेडिकल चेकअप भी कराया गया

रात लगभग 10:15 बजे विधानसभा के मार्शल ने विधायकों को एक-एक करके सदन से बाहर विधानसभा के परिसर में लाया, लेकिन इसके बावजूद विधायक परिसर में ही डटे रहे। इस दौरान सभी विधायकों का मेडिकल चेकअप भी कराया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस अप्रत्याशित स्थिति में कोई भी विधायक अस्वस्थ न हो। मेडिकल चेकअप के बाद भी विधायक विधानसभा परिसर में ही मौजूद रहे और उन्होंने फर्श पर बैठकर पूरी रात गुजारी।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक नई दिशा दी है। भाजपा विधायकों के इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल उनकी अपनी पार्टी बल्कि विपक्षी दलों का भी ध्यान खींचा है। भाजपा विधायकों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और जनता के मुद्दों के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। उनका यह भी कहना है कि राज्य सरकार को अपने वादों पर खरा उतरना चाहिए और जनता के सामने अपनी नीतियों को स्पष्ट करना चाहिए।

 

गुरुवार की सुबह तक, जब अन्य विधायकों और विधानसभा के अधिकारियों का आना-जाना शुरू हुआ, तब भी भाजपा विधायक विधानसभा परिसर में मौजूद थे। उनके इस दृढ़ और अडिग रुख ने राज्य की राजनीति में एक अलग ही संदेश दिया है।

 

विधानसभा परिसर में रात गुजारने वाले इन भाजपा विधायकों का यह कदम निश्चित रूप से राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण और साहसी कदम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार इस विरोध प्रदर्शन को कैसे संभालती है और अनुबंध कर्मियों के स्थाईकरण के मुद्दे पर क्या कदम उठाती है। भाजपा विधायकों का यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में क्या नया मोड़ लाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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