श्री अकाल तख्त साहिब का ऐतिहासिक निर्णय: गुरुद्वारों में अब बसंती रंग के निशान साहिब लगाए जाएंगे, पटियाला के गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब में पहला आयोजन”

अखंड केसरी ब्यूरो:-श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी किए गए नए हुक्मनामे के तहत अब गुरुद्वारों में बसंती रंग के निशान साहिब लगाए जाएंगे, जो सिख परंपरा और विरासत को एक नई पहचान देंगे। इसी कड़ी में पटियाला के ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब में बसंती रंग का निशान साहिब चढ़ाने का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर बीबी कुलदीप कौर टोहड़ा, गुरुद्वारा साहिब के मैनेजर और सिंह साहिबान की मौजूदगी में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

बीबी कुलदीप कौर ने इस अवसर पर बताया कि पहले समय में बसंती रंग ही निशान साहिब का होता था, जो सिखों की बहादुरी और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। समय के साथ बदलाव आया और गुरुद्वारों में केसरी रंग के निशान साहिब लगाए जाने लगे। लेकिन अब श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी हुक्मनामे के तहत निशान साहिब का रंग फिर से बसंती कर दिया गया है। यह निर्णय सिखों की पुरानी परंपरा को फिर से स्थापित करने और सिख धर्म के मूल सिद्धांतों को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर पहुंचे सिंह साहिबान ने कहा कि निशान साहिब सिख धर्म में आपसी भाईचारे और सेवा का प्रतीक है। गुरुद्वारा साहिब में लगे निशान साहिब दूर से ही दिखाई देते हैं, जो यह संकेत देते हैं कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को रहने के लिए आश्रय और खाने के लिए लंगर मिलेगा। निशान साहिब एकता, सेवा और समर्पण के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है, जो सिख धर्म के आधारभूत सिद्धांतों में से एक है।

सिंह साहिबान ने आगे कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दिए गए इस आदेश का पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ पालन किया जा रहा है। गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब में आयोजित इस विशेष समारोह में अरदास के उपरांत बसंती रंग के निशान साहिब को पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ चढ़ाया गया। इस आयोजन से न केवल गुरुद्वारा साहिब में उपस्थित संगत बल्कि पूरे सिख समुदाय में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

यह कदम सिख समुदाय के लिए एकता और पुरातन परंपराओं को जीवित रखने का संदेश देता है, जो आने वाली पीढ़ियों को सिख धर्म के मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति जागरूक करेगा। इस अवसर पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने पर गर्व महसूस किया और श्री अकाल तख्त साहिब के इस निर्णय का खुले दिल से स्वागत किया।

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