सिद्ध मां बगलामुखी धाम में सप्ताहिक दिव्य हवन यज्ञ हुआ सम्पन्न

जालंधर। मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।  सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान राजेश महाजन से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित मां भक्तों को आध्यात्मिक प्रवचनों द्वारा निहाल करते हुए कहते है कि सागर में जैसे एक मछली दूसरी मछली से पूछे कि सागर कहां है, वैसे ही हम इधर-उधर भटकते-पूछते हैं, परमात्मा कहां है?

उन्होंने कहा कि संत कबीरदास जी कहते थे कि ईश्वर हमसे चौबीस अंगुल दूरी पर है। यदि सचमुच परमात्मा इतने निकट हैं तो हर किसी को मिल जाने चाहिए। संत कबीरदास जी के ऐसा कहने के पीछे जो भेद छिपा है वह यह है कि आत्मा का स्थान हृदय होता है और मन का स्थान मस्तिष्क। हृदय से मस्तिष्क की दूरी चौबीस अंगुल है। आत्मा का ही अगला रूप परमात्मा है।

बुरे विचार या गलत काम का केंद्र मन होता है। जैसे ही यह सक्रिय हुआ, हृदय से आवाज भी आती है सत्य पर टिको, गलत कार्य अस्थायी हैं। यदि हम हृदय की भाषा सुनने से चूक जाएं तो मन वहां ले जाकर पटकता है, जिसे गलत दुनिया कहते हैं। इसलिए भीतर की सत्ता से जुड़े रहें तो बाहर की सत्ताएं हमसे गलत काम नहीं करवाएंगी। गलत में एक आकर्षण होता है और सही में सहज आमंत्रण। हृदय पुकारता है और मन खींचता है। धरती पर आकर इंसान अपने कर्मों का एक छोटा सा पौधा लगाता है, समय के साथ-साथ यह पेड़ बनकर बड़ा हो जाता है। इस पौधे को हम अच्छे कर्मों से सींचें या दुष्कर्मों से, इसका फल हमें इसी जीवन में भोगना होता है।

परमात्मा इस संसार के हर जीव में है। सर्वव्यापी परमात्मा यानी ईश्वर हमें गलत कार्यों के लिए हर पल रोकता है। लेकिन जब इंसान अपने क्रोध, लालच, स्वार्थ के चक्कर में पड़ जाता है तो ईश्वर अपने मन से दिखाई नहीं देता है। फिर उन्हें ढूंढने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। परमात्मा सत्य और सरल, पवित्र, दिव्य भाव से सभी जीवों से प्रेम करने वाले व्यक्ति के करीब होता है। साफ मन में ही परमात्मा का वास होता है। जब तक हम अपने मन को साफ नहीं करते, तब तक परमात्मा का प्रवेश हो ही नहीं सकता। हमारे मन को काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, बैर-विरोध जैसे विषाणु गंदा करते हैं। इन सब से छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले हमें अहंकार को छोडऩा होगा। अहंकार को छोडऩे पर जैसे ही स्वीकार भाव हमारे अंदर आ जाता है, तब हमारा अंतर्मन उज्ज्वल, धवल और निर्मल हो जाता है और परमात्मा का मंदिर बन जाता है।

इस अवसर पर बलजिंदर सिंह, दिशांत शर्मा, जानू थापर, अमरेंद्र कुमार शर्मा,दिनेश चौधरी, समीर कपूर, राकेश प्रभाकर,रिंकू सैनी, सरोज बाला,नरेश,कोमल ,सुभाष डोगरा, ऋषभ कालिया, कमलजीत,अभिषेक भनोट, धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह,जगदीश, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,बावा खन्ना, विनोद खन्ना, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत, बावा हलचल ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,सुक्खा अमनदीप, दुआ, अवतार सैनी, परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर,बलदेव सिंह, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,अशोक शर्मा, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय,बलदेव सिंह भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।

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