अखंड केसरी ब्यूरो :- बांग्लादेश में आरक्षण कोटा सुधार के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल छह आंदोलनकारियों ने ढाका पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आंदोलनकारियों ने कहा है कि उन्हें पुलिस हिरासत में बंदी बनाकर रखा गया और आंदोलन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। हिरासत से रिहा होने के एक दिन बाद, इन आंदोलनकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह दावा किया कि उन्हें सात दिनों तक जबरन बंदी बनाकर रखा गया था। इस बयान में कहा गया है कि उन्हें सुरक्षा के नाम पर कैद में रखा गया, जबकि वास्तविकता यह थी कि पुलिस ने उन्हें मानसिक और शारीरिक दबाव में रखा, ताकि वे अपने आंदोलन से पीछे हट जाएं।
बांग्लादेश के आंदोलनकारियों लोग की रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखेंगे
आंदोलनकारियों ने बयान में स्पष्ट किया है कि वे अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वे छात्रों और नागरिकों की हत्या के दोषियों को सजा दिलाने और हिरासत में लिए गए निर्दोष लोगों की रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उनका मानना है कि यह आंदोलन छात्रों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए है, और वे इसे किसी भी कीमत पर जारी रखेंगे।
बांग्लादेश में आरक्षण कोटा सुधार आंदोलन ने हाल के दिनों में एक व्यापक रूप ले लिया है। इस आंदोलन में शामिल लोगों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र और अन्य नागरिक संगठन भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। आज सुबह ढाका में, छात्रों ने एक बड़ा जुलूस निकाला, जिसमें उन्होंने आरक्षण कोटा सुधार आंदोलन में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने और गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई की मांग की। इस जुलूस ने सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया, ताकि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश में हाल के विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में पिछले 15 दिनों में 674 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें करीब 10 हजार 900 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हैं, जिन्होंने इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने इन विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है, और उनके साथ बदसलूकी भी की जा रही है। आंदोलनकारियों का मानना है कि यह सरकार की एक सोची-समझी साजिश है, ताकि विरोध की आवाज को दबाया जा सके।
सरकार की दमनकारी नीतियों के आगे झुकने वाले नहीं
बांग्लादेश में आरक्षण कोटा सुधार आंदोलन की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। यह आंदोलन अब केवल आरक्षण कोटा सुधार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रों और नागरिकों के अधिकारों के संघर्ष का प्रतीक बन गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे सरकार की दमनकारी नीतियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे और देश में न्याय और समानता की स्थापना के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
बांग्लादेश सरकार की स्थिति इस मामले में काफी नाजुक हो गई है। एक तरफ वह आंदोलनकारियों के दबाव का सामना कर रही है, जबकि दूसरी ओर वह देश की आंतरिक स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी बांग्लादेश की स्थिति पर नज़र रख रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह आंदोलनकारियों के साथ उचित व्यवहार करे और उनके अधिकारों का सम्मान करे।
बांग्लादेश में आरक्षण कोटा सुधार आंदोलन ने सरकार को एक कठिन परीक्षा में डाल दिया है। अब देखना यह है कि सरकार इस आंदोलन से कैसे निपटती है और आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उनके सभी साथियों को रिहा नहीं किया जाता और दोषियों को सजा नहीं दी जाती।


