फिलहाल मुख्य आरोपी कानूनगो फरार है, जिसकी तलाश जारी है। नकोदर के गुरु तेग बहादुर नगर निवासी एक व्यक्ति, जो खेती और पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का काम करता है, उसने गांव हरीपुर में 12 मरले का एक घर खरीदा था। इस घर की सेल डीड को लेकर एक सिविल मुकदमा चल रहा था।
अदालत का फैसला शिकायतकर्ता के पक्ष में आने के बाद और अपील खारिज होने पर, कानूनी तौर पर सेल डीड तो दर्ज हो गई, लेकिन घर का कब्जा मिलना बाकी था। घर का कब्जा दिलाने के लिए आरोपी कानूनगो जतिंदर सिंह को अर्जी दी गई थी।
भ्रष्टाचार का जाल और वसूली
शिकायत के अनुसार, आरोपी कानूनगो ने पहले कंप्यूटरीकृत हदबंदी के नाम पर शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये वसूले। इसके बाद घर खाली कराने का नोटिस जारी किया गया। लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब कानूनगो जतिंदर सिंह ने कब्जा दिलाने के बदले तहसीलदार के नाम पर 1,00,000 रुपये की भारी रिश्वत मांग ली।
शिकायतकर्ता के बार-बार विनती करने पर भी कानूनगो नहीं माना। दबाव में आकर 10,000 रुपये की पहली किस्त मौके पर ही दे दी गई और बाकी पैसे किस्तों में देना तय हुआ।
विजिलेंस का बिछाया जाल और गिरफ्तारी
शिकायतकर्ता ने रिश्वत की मांग वाली पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली और विजिलेंस ब्यूरो जालंधर से संपर्क किया। विजिलेंस की योजना के अनुसार, जब कानूनगो ने अगली किस्त मांगी, तो उसने खुद न आकर अपने भाई परमिंदर सिंह को पैसे लेने भेज दिया। जैसे ही परमिंदर सिंह ने शिकायतकर्ता से 20,000 रुपये पकड़े, विजिलेंस की टीम ने दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में उसे रंगे हाथों दबोच लिया।विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुख्य आरोपी कानूनगो जतिंदर सिंह अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। विभाग का कहना है कि उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस मामले में शामिल अन्य कड़ियों की भी जांच की जा रही है।