जानें क्या है पूरा मामला
स्विस बैंक में खाते होने का लगा आरोप: कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह से जुड़ा फेमा (Foreign Exchange Management Act) का मामला 2006 का है। 2006 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने आरोप लगाया कि रणइंदर सिंह और उनके परिवार के सदस्य ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में बनाए गए एक ट्रस्ट और उससे जुड़े विदेशी बैंक खातों के लाभार्थी हैं। इनमें स्विस बैंका का भी खाता होने का आरोप है।
ट्रसट के जरिए विदेश में पॉपर्टी बनाने का आरोप: जांच एजेंसियों का दावा है कि कैप्टन फैमिली ने ट्रस्ट के जरिए ब्रिटेन और अन्य देशों में करोड़ों की कीमत की प्रॉपर्टियां बनाई हैं। इनका लेखा-जोखा भारत में इनकम टैक्स को नहीं दिखाया गया। ये भी आरोप है कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए पैसे का सोर्स भी नहीं बताया है। इससे फेमा नियमों को तोड़ा गया है।
लुधियाना कोर्ट में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दी थी शिकायत : शुरुआत में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने लुधियाना की अदालत में शिकायत दर्ज की थी कि उन्होंने अपनी विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी छुपाई है। इसी शिकायत के आधार पर ED ने अपनी जांच शुरू की ताकि मनी लॉन्ड्रिंग और फारेन करंसी नियमों के उल्लंघन का पता लगाया जा सके।
2025 में हाईकोर्ट ने दी जांच की परमिशन: 2006 से चल रहा मामला कई कानूनी पेचीदगियों में फंसा रहा, लेकिन सितंबर 2025 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने ED को उन सभी दस्तावेजों और सबूतों की जांच करने की परमिशन दे दी जो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जुटाए थे।
जालंधर ईडी सामने बैठाकर करेगी पूछताछ
हाईकोर्ट के आदेश के बाद ED ने जांच तेज की है। ताजा समन फरवरी 2026 को जारी किया गया है। इसका उद्देश्य रणइंदर सिंह और कैप्टन अमरिंदर सिंह से उन ट्रांजेक्शन और विदेशी निवेश के बारे में आमने-सामने पूछताछ करना है, जिनका रिकॉर्ड इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और विदेशी एजेंसियों से मिला था।