9 मार्च को 10वीं कक्षा का पेपर चल रहा था। परीक्षा केंद्र के सुपरिटेंडेंट भूपिंदर पाल सिंह और उनकी टीम परीक्षा कक्षों में औचक निरीक्षण कर रही थी। जब टीम रोल एक छात्रा की डेस्क पर पहुंची तो वहां बैठी लड़की घबरा गई। सुपरिटेंडेंट ने जब रोल नंबर स्लिप उठाई, तो उस पर लगी फोटो और परीक्षा दे रही लड़की का चेहरा अलग-अलग था।
पूछताछ में हुआ खुलासा
गहनता से जांच की गई तो पता चला कि असली छात्रा की जगह कोई और लड़की बैठकर पेपर दे रही थी। पकड़े जाने के बाद सेंटर सुपरिटेंडेंट ने तुरंत नकल और फर्जीवाड़े का केस तैयार किया। पहले तो मामला विभाग के भीतर रहा, लेकिन जैसे ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए। देर शाम थाना नंबर 5 की पुलिस को लिखित शिकायत दी गई। जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पुलिस ने बोर्ड की गाइडलाइंस और सरकारी आदेशों के उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की है जिसमे धारा 319 (2) पहचान बदलकर धोखाधड़ी करना, धारा 318 (2) धोखाधड़ी और बेईमानी, धारा 61 (2) आपराधिक साजिश रचना शामिल है।
पुलिस अब दोनों छात्राओं से पूछताछ कर रही है कि क्या इसके बदले किसी तरह के पैसों का लेनदेन हुआ था या यह सिर्फ सहेली की मदद के लिए किया गया कदम था।
बोर्ड ने 25 फरवरी को ही सख्त आदेश जारी किए थे। परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। हमने रिपोर्ट बोर्ड को भेज दी है और पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इसके पीछे कोई और तो नहीं ।
