कांग्रेस-भाजपा के खेमे में खुशी की लहर
इस फैसले को लेकर एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी के खेमे में असमंजस की स्थिति है तो भाजपा और कांग्रेसी खेमे में खुशी का माहोल है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, आप नेताओं का कहना है कि सरकार ने समय पर चुनाव करवाने के मकसद से अपनी नोटिफिकेशन वापस ली है। निकाय चुनाव में पार्टी की जीत अब भी पक्की है। लेकिन, भाजपा और कांग्रेस का कहना है कि हाईकोर्ट में केस को कमजोर होता देख कर आम आदमी पार्टा ने हार खुद स्वीकार की है।

बेवजह हाय तौबा मचा रहे विपक्षी – विभूती शर्मा
आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज विभूती शर्मा ने कहा कि विपक्षी बेवजह हायतौबा मचा रहे हैं। 2015 में भाजपा ने वार्डबंदी बदली, 2020 में कांग्रेस ने फिर से वार्डबंदी में बदलाव किया। अब जब नई वार्डबंदी का ड्राफ्ट आया तो परेशानी हो रही है।
नई या पुरानी वार्डबंदी का असर चुनाव पर नहीं पड़ेगा। आम आदमी पार्टी हर हाल में जीत हासिल करेगी। कांग्रेस और भाजपा के शासन में कोई विकास कार्य नहीं हुए। जबकि, आप लोगों की पार्टी है। नगर निगम चुनाव में आप के सभी उम्मीदवार एक तरफा जीत हासिल करेंगे।

ये फैसला भाजपा की बड़ी जीत – पूर्व मेयर
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मेयर अनिल वासुदेवा ने हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र के हित में बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वार्डबंदी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। अब अदालत के स्पष्ट आदेश से स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है और चुनाव समय पर निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकेंगे।
अनिल वासुदेवा ने आगे कहा कि पुरानी वार्डबंदी के आधार पर चुनाव करवाने का निर्णय भाजपा के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा सकता है। उनके अनुसार, भाजपा पहले से ही इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखती थी और अदालत का यह फैसला उसी दिशा में गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस निर्णय से पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का उचित अवसर मिलेगा।

कांग्रेस का ही बनेगा हाउस-मेयर
मौजूदा मेयर और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पन्ना लाल भाटिया ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि आप का ये हथकंडा भी उनके काम नहीं आया है। कांग्रेस फिर से बहुमत से नगर निगम पर काबिज होगी। सरकार ने सत्ता के नशे में चूर होकर लोगों के चुने नुमाइंदों के खिलाफ ये षड़यंत्र रचा था। जिसमें सरकार खुद ही फंस गई। हाईकोर्ट के बाद अब लोग भी अगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी को आईना दिखाने के लिए बेताब हैं।
निकाय चुनावों पर टिकी शहरियों की नजर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर चुनावी तैयारियां भी तेज हो गई हैं। विभिन्न दल अपने उम्मीदवारों के चयन और रणनीति बनाने में जुट गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा और पुराने वार्डों के आधार पर ही उम्मीदवारों की ताकत का आकलन किया जाएगा। कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के इस फैसले ने नगर निगम पठानकोट चुनावों की दिशा स्पष्ट कर दी है और अब सभी की निगाहें आगामी चुनावों पर टिकी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला
2021 में नगर निगम चुनाव पुरानी वार्डबंदी के आधार पर हुए थे। वार्ड सीमाएं पहले से तय थीं और राजनीतिक पार्टियों का स्थिर वोट बैंक बन चुका था। 2021 में आप पार्टी का कोई पार्षद जीत नहीं सका था। इसमें कांग्रेस के 37, भाजपा के 11, अकाली दल 1 और 1 आजाद उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में कांग्रेस के 5 पार्षद आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। लेकिन, बहुमत कांग्रेस के पास रहा।
दिसंबर में नई वार्डबंदी का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी हुआ। इसमें कई वार्डों की सीमाएं बदली गईं। कुछ वार्डों का आकार और जनसंख्या बदली गई। आरक्षण (SC/महिला) में बदलाव किया गया। जिसके बाद विपक्ष (भाजपा-कांग्रेस)ने वार्डों की सीमाएं राजनीतिक फायदे के लिए बदले जाने का आरोप लगाया।
आरोप था कि जहां भाजपा और कांग्रेस मजबूत थीं, वहां बदलाव ज्यादा किए गए। आरक्षण भी मैनेज किया गया। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नई हदबंदी में बदलाव पर रोक लगाई और सरकार से जवाब मांगा। अब फैसला आया कि चुनाव पुरानी वार्डबंदी पर ही होंगे।
