अमनदीप कौर के खिलाफ बठिंडा विजिलेंस ब्यूरो में 26 मई को एफआईआर नंबर 15 दर्ज की गई थी। उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(B) के साथ पठित 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि 1 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2025 तक सात साल की अवधि के दौरान उनके पास 48 लाख रुपए की अनुपातहीन संपत्ति थी। याचिकाकर्ता के सीनियर वकील डॉ. अनमोल रतन सिद्धू ने कोर्ट को बताया कि अमनदीप कौर लगभग छह महीने से हिरासत में थीं। राज्य द्वारा दाखिल किए गए हिरासत प्रमाण पत्र के अनुसार, वह 5 महीने और 19 दिन से जेल में थीं।
14 नवंबर को चालान पेश, लेकिन आरोप तय नहीं हुए
कोर्ट ने जमानत देते समय पाया कि मामले में 14 नवंबर, 2025 को चालान पेश किया जा चुका है, लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं। केस में कुल 46 गवाह हैं, जिसके चलते ट्रायल में काफी समय लगने की संभावना है। कोर्ट ने कहा कि आगे की कैद याचिकाकर्ता के संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित अधिकार का उल्लंघन होगा। यह भी बताया गया कि वह एनडीपीएस एक्ट के एक अन्य मामले में भी जमानत पर हैं।
कई शर्तों का पालन करना होगा
कोर्ट ने अमनदीप कौर को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, लेकिन उन्हें ट्रायल कोर्ट/ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष जमानत/सुरक्षा बॉन्ड प्रस्तुत करना होगा और कई शर्तों का पालन करना होगा। इन शर्तों में ट्रायल के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना, अभियोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव न डालना या धमकाना नहीं, ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ना और मुकदमे की समाप्ति तक अपना पता और मोबाइल नंबर नहीं बदलना शामिल है।
