सुनवाई के दौरान उनके वकील ने बताया कि पिछली याचिका में हाईकोर्ट ने लोकसभा में उचित प्रतिनिधित्व भेजने की अनुमति दी थी जो अब भेज दिया गया है। इस पर बेंच ने पूछा कि उनके एनएसए डिटेंशन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका का क्या हुआ। चीफ जस्टिस ने कहा कि जब तक डिटेंशन पर रोक नहीं लगती, वे संसद में कैसे शामिल होंगे? वकील ने जवाब दिया कि दोनों मामले अलग हैं और संसद में शामिल होने के लिए धारा 15 के तहत राहत मांगी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमृतलाल को पहले शपथ ग्रहण के लिए चार दिन की रिहाई मिली थी। याचिका में कहा गया है कि अप्रैल 2023 से प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने के बावजूद वह 2024 लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब से लगभग चार लाख मतों से जीतकर पहुंचे और अभी भी करीब 19 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की है कि उन्हें पैरोल पर रिहा किया जाए या वैकल्पिक रूप से संसद सत्र के दौरान उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। याचिका में यह भी कहा गया कि 17 अप्रैल 2024 को उनके खिलाफ तीसरा डिटेंशन आदेश जारी हुआ था, जिसे बाद में एडवाइजरी बोर्ड ने सही ठहराया और 24 जून को इसे पुष्टि कर दी गई। पैरोल के लिए 13 नवंबर को प्रतिनिधित्व दिया गया था, जो अभी तक लंबित है।
