सेना ने CIF डेल्टा, व्हाइट नाइट कोर, पुलिस और CRPF के साथ ऑपरेशन किया। आतंकवादियों को रामनगर-बसंतगढ़ इलाके के जाफर जंगल में ढूंढा गया।
सेना ने बताया कि मारे गए आतंकवादियों में से एक जैस का टॉप कमांडर रुबानी उर्फ अबू माविया है। जो इलाके में कई साल से सक्रिय था। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के पास से M4 कार्बाइन, AK-47 असॉल्ट राइफल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया।



ऑपरेशन ‘किया’ चलाया गया
व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि CIF डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF का यह जॉइंट आपरेशन था। इसके तहत इलाके की घेराबंदी की गई। इसे ऑपरेशन ‘किया’ नाम दिया गया।
मुठभेड़ मंगलवार को शाम 4 बजे शुरू हुई। आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग किए। करीब एक घंटे तक चली मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को गोली लगी, लेकिन वह अपने साथी के साथ गुफा के अंदर जाकर छिप गया।
मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे आतंकियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर गुफा से बाहर निकलने की कोशिश की। इस दौरान फिर से फायरिंग हुई और तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके बाद अतिरिक्त सुरक्षाबलों को इलाके में भेजा गया और घेराबंदी और कड़ी कर दी गई।
सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर UBGLs (अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) का इस्तेमाल किया। जिससे एक हिस्से को विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया गया। एक आतंकवादी का शव गुफा के मुहाने पर पड़ा था, जबकि दूसरा गुफा के अंदर काफी गहराई में पड़ा मिला।
ऑपरेशन त्राशी-1 अभी भी जारी
उधमपुर के साथ-साथ किश्तवाड़ जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 भी चल रहा है। यह ऑपरेशन 18 जनवरी को चतरू बेल्ट के मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव के जंगलों में शुरू किया गया था।
ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान पिछले 15 दिनों में आतंकियों के साथ चार बार मुठभेड़ हो चुकी है। 18 जनवरी को हुए पहले एनकाउंटर में 8 जवान घायल हुए थे, जिनमें से हवलदार गजेंद्र सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद 22 और 24 जनवरी को अलग-अलग मुठभेड़ हुईं, जबकि 31 जनवरी को डोलगाम इलाके में फिर से गोलीबारी हुई।
