जालंधर/जीवन भास्कर
मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान बिशन सिंह से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध मां बगलामुखी धाम के मुख्य प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित मां भक्तों को प्रेरक दोहे द्वारा मंत्रमुग्ध करते हुए कहते है कि
‘‘आग लगी इस वृक्ष को जलने लगे हैं पात, उड़ जाओ ऐ पक्षियों जब पंख तुम्हारे साथ
फल खाए इस वृक्ष के, गंदे कीन्हें पात, यही हमारा धर्म है, जल मरें इसी के साथ ’’
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि यह दोहा अकसर एक कहानी के संदर्भ में इस्तेमाल होता है, जो कर्तव्यनिष्ठा और कृतज्ञता की सीख देता है। एक घने जंगल में एक विशाल वृक्ष था, जिस पर कई पक्षी रहते थे। वे उस वृक्ष के फल खाते थे, उसकी छाया में आराम करते थे और वहाँ सुरक्षित महसूस करते थे। एक बार, गर्मी के मौसम में जंगल में भीषण आग लग गई। आग तेजी से फैली और उस विशाल वृक्ष तक पहुँच गई। वृक्ष के पत्ते जलने लगे।
आग देखकर सभी पक्षी घबरा गए। वे तुरंत अपनी जान बचाने के लिए आसमान में उड़ गए। तभी कुछ पक्षी, जिन्होंने अपनी पूरी जि़ंदगी उसी पेड़ पर बिताई थी, वहीं रुके रहे। दूसरे पक्षियों ने उनसे कहा, इस पेड़ में आग लग गई है, पत्ते जल रहे हैं, तुम्हारे पास पंख हैं, उड़ जाओ और अपनी जान बचाओ। तो पेड़ पर बैठे पंक्षियों ने कहा हमने इसी वृक्ष के फल खाए, यहीं बड़े हुए, और इसी को गंदा किया। अब जब इस पर विपत्ति आई है, तो हमारा धर्म है कि हम इसे छोडक़र न भागें, बल्कि इसी के साथ रहें। यह कहकर वह वहीं रहे।
नवजीत भारद्वाज जी ने बड़े भावुक ढंग से मां भक्तों को कहा कि इस कहानी से कई महत्वपूर्ण नैतिक शिक्षाएँ मिलती हैं। कर्तव्यनिष्ठा और कृतज्ञता से जुड़ी वफादारी की सीख को इन बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है।
कर्तव्यनिष्ठा: यह अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने का गुण है। कर्तव्यनिष्ठा वफादारी की नींव है, क्योंकि यह दर्शाता है कि एक व्यक्ति अपने वचन और प्रतिबद्धताओं को कितना महत्व देता है।
कृतज्ञता: यह उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना है जिन्होंने हमारी मदद की है या हमारे जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाला है। कृतज्ञता संबंध बनाती है और उन्हें मजबूत में करती है, जिससे आपसी विश्वास और वफादारी बढ़ती है।
वफादारी: यह किसी व्यक्ति, समूह या आदर्श के प्रति अटूट समर्थन और समर्पण की भावना है। कर्तव्यनिष्ठा और कृतज्ञता वफादारी के दो स्तंभ हैं।
नवजीत भारद्वाज जी इन प्रवचनों को संक्षेप में बताते है कि जब हम अपने कर्तव्यो का पालन करते हैं और दूसरों के सहयोग के लिए आभारी होते हैं, तो हम वास्तव में वफादारी का सबसे अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इस अवसर पर भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारी का आयोजन किया गया।
