पश्चिम बंगाल के सीईओ कार्यालय ने फर्जी मतदाताओं की पहचान के लिए नया सॉफ्टवेयर शुरू किया है। चुनाव आयोग को मिले चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद यह पहल ईआरओ और डीईओ स्तर पर लागू की जा रही है।
दिसंबर 05, नई दिल्ली:- पश्चिम बंगाल में फर्जी मतदाताओं को पकड़ने के लिए सीईओ कार्यालय ने नई तकनीक शुरू की है। “डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज” नाम का यह सॉफ्टवेयर फर्जी या दोहराए गए नामों की पहचान करेगा। यह सिस्टम ईआरओ के डैशबोर्ड पर लागू हो चुका है और शनिवार तक डीईओ भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
इस बीच चुनाव आयोग को मृत मतदाताओं से जुड़े चौंकाने वाले संशोधित आंकड़े मिले हैं। पहले बताया गया था कि राज्य के 2208 बूथों पर पिछले 23 वर्षों में कोई भी मृत मतदाता दर्ज नहीं मिला। लेकिन आयोग के सवाल करने पर यह संख्या अचानक घटकर सिर्फ 7 कर दी गई।
माना जा रहा है कि ऐसे संभावित गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का पता लगाने के लिए ही यह नई तकनीक लागू की गई है, ताकि वोटर सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाया जा सके।
