केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की बड़ी घोषणा : भाजपा अकेले सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, गठबंधन पर क्या बोले?

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए राजनीतिक दल अभी से सक्रिय हो गए हैं। वर्ष 2027 की शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने चुनाव को लेकर बड़ा एलान किया है। रवनीत सिंह बिट्टू का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब में सभी 117 सीटों पर अपने दम पर 2027 में विधानसभा चुनाव का लड़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन की संभावना को लगभग खारिज कर दिया है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब बिट्टू से पूछा गया कि क्या भाजपा फिर से शिअद के साथ गठबंधन करेगी, तो उन्होंने कहा- हमारा रुख बिल्कुल साफ है। भाजपा पंजाब में 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। बिट्टू ने कहा कि भाजपा की पंजाब इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने भी यह बात स्पष्ट कर दी है।

बिट्टू ने कहा कि अगर आज हम उनके (शिअद) साथ समझौता करते हैं तो जनता को कौन-सा चेहरा दिखाएंगे? उन्होंने शिअद पर ड्रग्स और बेअदबी के मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। बिट्टू ने कहा कि पार्टी तरन तारन विधानसभा उपचुनाव भी अकेले लड़ रही है। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल ने 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से नाता तोड़ लिया था।

इस मौके पर बिट्टू ने कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के ऑपरेशन ब्लू स्टार पर दिए बयान पर कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम कह रहे हैं कि यह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गलती थी। अब पंजाब कांग्रेस नेताओं को अपना रुख साफ करना चाहिए कि अगर आपके नेता ऐसा कह रहे हैं, तो आप भी बताइए कि आपका क्या स्टैंड है।

दरअसल, चिदंबरम ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली में एक साहित्यिक कार्यक्रम में कहा था कि ऑपरेशन ब्लू स्टार आतंकवादियों से निपटने का गलत तरीका था और इंदिरा गांधी ने अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकाई। आतंकियों को पकड़ने के और तरीके भी थे, लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार गलत रास्ता था। यह फैसला केवल इंदिरा गांधी का नहीं था बल्कि सेना, खुफिया एजेंसियों और पुलिस समेत कई स्तरों का सामूहिक निर्णय था।

बता दें कि ऑपरेशन ब्लू स्टार वर्ष 1984 में 1 से 10 जून के बीच अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों को बाहर निकालने के लिए किया गया सैन्य अभियान था। इसके कुछ महीनों बाद 31 अक्तूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी।

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