अमृतसर। पंजाब में आज, 6 अक्टूबर 2025 को किसान मजदूर मोर्चा और इससे जुड़ी विभिन्न जत्थेबंदियों की ओर से राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कुल 14 जिलों के 59 विभिन्न स्थानों पर यह प्रदर्शन आयोजित किया गया है। जिसमें भगवंत मान और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अर्थी फूंक कार्यक्रम किए जाएंगे।
किसान मजदूर मोर्चा के प्रधान सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि हाल ही में आई बाढ़ से किसानों की फसलें, खेत, पशुधन, दुकानें और खेत मजदूरों का रोजगार पूरी तरह बर्बाद हो गया, लेकिन सरकारों ने अभी तक कोई प्रभावी राहत या मुआवजा नहीं दिया है। किसान संगठनों का कहना है कि पानी उतर चुका है, पर सरकार की संवेदनशीलता अब भी नदारद है।


अमृतसर में गोल्डन गेट पर किसान प्रदर्शन करते हुए।
जानें कहां-कहां होगा प्रदर्शन
6 अक्टूबर 2025 को पंजाब के 14 जिलों में कुल 59 स्थानों पर प्रदर्शन होगा। यहां-यहां होंगे प्रदर्शन-
- अमृतसर: गोल्डन गेट, रईया, कत्थूनंगल टोल, लोपोके, अटारी, अजनाला – 6 जगह
- तरनतारन: खडूर साहिब, फतेहाबाद, चोहला साहिब, सरहाली, रसूलपुर नहरें, गोहलवड़, पट्टी, खेमकरण, घड़ियाला, भिखीविंड, सहेबाजपुर, मानोचाहल – 12 जगह
- गुरदासपुर: डेरा बाबा नानक, कलानौर, गुरदासपुर, भैणी मियां खां, पुराना शाला, सठियाली पुल, हरगोबिंदपुर, घुमान, बटाला – 9 जगह
- फिरोजपुर: गुरु हरसहाए, ममदोट, फिरोजपुर, मलांवाला, मखू, जीरा – 6 जगह
- मोगा: धर्मकोट, कोट ईसे खां, फतेहगढ़ पंजतूर, मोगा, निहालसिंह वाला, बाघापुराना – 6 जगह
- फाजिल्का: डीसी दफ्तर, जलालाबाद – 2 जगह
- जालंधर: लोहीयां, माहितपुर, शाहकोट – 3 जगह
- कपूरथला: सुलतानपुर लोधी, ताशपुर चौक, कोट कराड़खां, भाणो लंगा, उच्चा चौक, नडाला – 6 जगह
- होशियारपुर: रढ़ा पुल, चौलांग टोल, दसूहा सिटी, टांडा चौक – 4 जगह
- पठानकोट: तारागढ़, जामनी चौक – 1 जगह
- रोपड़: 1 जगह
- लुधियाना: समराला – 1 जगह
- बठिंडा: भाई भगता – 1 जगह
- मुक्तसर: लंबी – 1 जगह
मोर्चा की ओर से जारी मांगपत्र की प्रमुख मांगे
- धान की फसल के लिए ₹70,000 प्रति एकड़ मुआवज़ा दिया जाए, जिसमें से 10% खेत मजदूरों को मिले।
- पशुपालकों, दुकानदारों और मकान मालिकों को नुकसान के अनुसार राहत दी जाए।
- गेहूं की बुवाई के लिए खाद, बीज और डीज़ल सरकार द्वारा मुफ़्त दिया जाए।
- बाढ़ग्रस्त खेतों से रेत हटवाई जाए और रेत निकालने पर कोई पाबंदी न लगाई जाए।
- डैमों से अचानक छोड़े गए पानी की न्यायिक जांच करवाई जाए क्योंकि यह प्राकृतिक नहीं, मानव-जनित त्रासदी थी।
- नदियों को पक्के बांध देकर नहरनुमा स्वरूप प्रदान किया जाए ताकि भविष्य में बाढ़ से बचाव हो सके।
- पराली प्रबंधन के नाम पर किसानों पर थोपे जा रहे जुर्मानों को रोका जाए और सरकार ₹200 प्रति क्विंटल या ₹6000 प्रति एकड़ की दर से सहायता दे।
- धान की खरीद प्रक्रिया में रुकावट न आए, गन्ने का बकाया तुरंत जारी हो, और नरमा व बासमती की फसलों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए।
