वकीलों का कहना है कि राज्य में लूटपाट और चोरी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। आम नागरिकों को कोर्ट से जमानत मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि लुटेरों और चोरों को आसानी से जमानत मिल जाती है। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान ने बताया कि पुलिस द्वारा चोरों को पकड़े जाने पर, सरकारी नीति के तहत उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता और जमानत मिल जाती है।
सरकार पर वकीलों ने लगाया आरोप
वकीलों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी जमानत के पैसों का भी इंतजाम करती है, जिससे अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा है क्योंकि अपराधियों को पता है कि सरकार उन्हें बचा लेगी। वहीं दूसरी मांग ग्राम पुलिस व्यवस्था से संबंधित है, जिसके तहत वकीलों को गांवों में जाकर कोर्ट लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
वकीलों को गांवों में जाकर कोर्ट लगाने का विरोध
वकीलों का तर्क है कि यदि ऐसी व्यवस्था शुरू करनी है, तो इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि केरल, तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से पेशी पर आने वाले लोगों के लिए उनके ही राज्य में एक बेंच बनाई जाए। इसी तरह, हाई कोर्ट के लिए चंडीगढ़ जाने के बजाय गुरदासपुर, पटियाला सहित अन्य जिलों में बेंच स्थापित की जानी चाहिए।
तीसरा मुद्दा फैक्टर एक्शन प्लान केस से जुड़ा
तीसरा मुद्दा फैक्टर एक्शन प्लान केस से जुड़ा है। इसमें पहले मामलों को पुराना किया जाता है और फिर उनके शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए जाते हैं। वकीलों का कहना है कि इस प्रक्रिया से पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता और वकीलों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है।
कोर्ट में कोई भी वकील नहीं हुआ उपस्थित
इन्हीं तीनों मुद्दों को लागू न किए जाने के विरोध में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। पंजाब भर के बार एसोसिएशन के अध्यक्षों द्वारा आज हड़ताल का आह्वान किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप आज किसी भी कोर्ट में कोई वकील उपस्थित नहीं हुआ।