मां बगलामुखी जी के निमित दिव्य हवन यज्ञ समपन्न

जालंधर/जीवन भास्कर

मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान संजीव शर्मा से परिवार सहित विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित मां भक्तों को प्रवचनों से मंत्रमुग्ध करते हुए ‘‘गुरु लाधो रे! गुरु लाधो रे’ ’ की साखी का ब्याख्यान किया कि सिखों के आठवें गुरु हरि कृष्ण जी ज्योति ज्योत में समा जाने से पहले वे सभी भक्तों को बाबा बकाला कहकर गुरु गद्दी सौंप गए थे। उनके जाने के बाद 22 ढोंगी गुरु बन बैठे थे। कुछ सालों बाद मक्खन शाह लुबाना, एक गुरुभक्त व्यापारी ने आँधी तूफान की चपेट में आया हुआ अपना जहाज किनारे पहुँचाने के लिए सतगुरु से प्रार्थना की और गुरु नानक देव जी की गद्दी पर विराजमान गुरु को 500 मोहरें भेंट चढ़ाने की मन्नत की। सतगुरु की कृपा से जहाज ठीक-ठाक किनारे पहुँच गया। अपने वादे के अनुसार मक्खन शाह बाबा बकाला साहिब पहुँचे तो गद्दी पर 22 गुरुओं को देख असमंजस में पड़ गए फिर उन्होंने सोचा कि गुरु तो अंतर्यामी हैं, अपने आप बता देंगे। असली गुरु को कैसे खोजा जाए, यह एक समस्या थी। उन्होंने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया और अंत में अपना चढ़ावा सभी गुरुओं में बाँटने का मन बना लिया। वे बारी-बारी से उनके पास गए और प्रत्येक को दो-दो मोहरें भेंट कीं। सभी झूठे गुरु खुश हो गए। मक्खन शाह को कोई भी सच्चा गुरु न मिला। भक्तों से किसी और गुरु के बारे में पूछने पर वे एकांत में बैठे गुरु तेग बहादुर जी के पास पहुँचे। मक्खन शाह ने गुरु तेग बहादुर जी को आंखें बंद किए और मन शांत आराम से बैठा पाया। मक्खन शाह ने प्रणाम किया और बहुत प्यार से गुरु के आसन के पास दो मोहरें रख दी। गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी आंखें खोलीं और बहुत धीरे से मुस्कुराए और कहा, ‘‘हे मक्खन शाह, अब तुम गुरु को धोखा देने की कोशिश क्यों कर रहे हो, पांच सौ मोहरें के बजाय केवल दो मोहर भेंट करके? मुझे अपने गुरुभक्तों द्वारा अपने वादे तोडऩा, झूठ बोलना या दूसरों को धोखा देना पसंद नहीं है।’ ’ मक्खन शाह, गांव बकाला (अमृतसर) में घर की छत से चिल्लाते हुए – गुरु लाधो रे, गुरु लाधो रे (मुझे सच्चा गुरु मिल गया है!) मक्खन शाह को बहुत आश्चर्य हुआ और उसे समझ में नहीं आया कि क्या कहे। अपनी खुशी को रोक पाने में असमर्थ, एक घर की छत पर चढ़ गया और एक झंडा लहराते हुए, पूरी आवाज में दावा किया, गुरु लाधो रे! गुरु लाधो रे! (मैंने गुरु को पा लिया है! मैंने गुरु को पा लिया है!)।
नवजीत भारद्वाज ने इस मनमोहक साखी का अर्थात् समझाते हुए कहा कि अपने सच्चे गुरु पर विश्वास रखो वो कभी भी आपको मझंधार में नहीं छोड़ता। हमारा कर्तव्य भी बनता है कि अपने सच्चे गुरु द्वारा दी गई शिक्षाओं और किए वादों को पूरी निष्ठा से निभाएं। आपका सच्चा गुरु ही आपको सतगुरु से जोड़ता है।
इस अवसर श्वेता भारद्वाज, राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,बावा खन्ना, धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, विनोद खन्ना, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,सुक्खा अमनदीप,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल,रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय,बलदेव सिंह भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।

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