उन्होंने कहा कि धरना मुख्य रूप से जेलों में बंद साथियों की रिहाई और सभी कर्मचारियों को नौकरी पर बहाल करवाने की मांग को लेकर लगाया गया था। यूनियन नेताओं के मुताबिक, मैनेजमेंट ने इन मांगों पर सहमति जताई, जिसके बाद हड़ताल को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। अब 5 दिन से डिपो में खड़ी 1600 बसें सड़कों पर दौड़ने लगी हैं।

लुधियाना बस स्टैंड पर हड़ताल खत्म होने के बाद बस में बैठी सवारी।

जानिए 5 दिन में क्या क्या हुआ….
- 28 नवंबर से हड़ताल, डिपो में खड़ी की बसें: सर्विस को रेगुलर करने व किलोमीटर स्कीम के तहत प्राइवेट बसों को हायर करने के लिए सरकार द्वारा जारी टेंडर को रद्द करने की मांग को लेकर कांट्रैक्ट वर्कर्स ने 28 नवंबर से हड़ताल शुरू कर दी थी। राज्य में करीब 1600 बसें अलग अलग डिपो में खड़ी कर दी।
- कर्मचारियों और पुलिस में टकराव: हड़ताल के पहले दिन पूरे प्रदेश में कर्मचारियों और पुलिस में टकराव हुआ। उस दिन कई जिलों में कर्मचारी पेट्रोल की बोतलें लेकर पानी के ओवर हेड टंकियों पर चढ़ गए थे, जो कि अभी तक नीचे नहीं उतरे।
- 1 दिसंबर को 7 घंटे चली मीटिंग, कई मांगों पर सहमति: 1 दिसंबर को सरकार के साथ करीब 7 घंटे मीटिंग हुई। बुढलाडा डिपो यूनियन नेता राजवीर सिंह का कहना है कि सरकार के साथ चली बैठक में कुछ मांगें मानी गई। जिसमें यह तय हुआ था कि यूनियन के जितने भी साथी गिरफ्तार हुए हैं, उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। यूनियन के जिन नेताओं को टर्मिनेट या सस्पेंड किया गया है उन्हें बहाल कर दिया जाएगा। इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिमों को डिपार्टमेंट में पक्का करने की बात पर भी सहमति बनी। लेकिन सरकार ने अभी तक इनमें किसी एक का भी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि मीटिंग खत्म किए एक रात पूरी बीत गई, लेकिन गिरफ्तार कर्मचारियों को रिहा तक नहीं किया गया था।

- सरकार ने जो फैसले किए अफसर वो भी लागू नहीं कर रहे: यूनियन नेता गुरप्रीत सिंह वड़ैच ने बताया कि ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के साथ हुई बैठक में कुछ बातों पर यूनियन की सहमति बन गई थी, लेकिन मैनेजमेंट के अफसरों ने उन्हें भी लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि यूनियन ने साफ कहा था कि जब तक उनके साथी रिहा नहीं होते और उनके खिलाफ दर्ज केस रद्द करने का नोटिफिकेशन नहीं होता हड़ताल जारी रहेगी।
- बुढलाडा में पानी की टंकी पर डटे 3 मुलाजिम: बुढलाडा में पानी की टंकी पर डिपो यूनियन प्रधान राजवीर सिंह व उसके साथ दो अन्य कर्मचारी पांच दिन से पेट्रोल की बोतलें लेकर डटे थे। मंगलवार तड़के राजबीर सिंह ने यूनियन नेताओं को साफ कह दिया कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती तब तक हड़ताल वापस न लें। सरकार ने अगर ज्यादा जोर जबरदस्ती की तो वो पेट्रोल छिड़कर आत्मदाह कर देंगे।
- मैनेजमेंट की मीटिंग में मांगों पर सहमति, हड़ताल खत्म: लुधियाना में यूनियन के उपप्रधान गुरप्रीत सिंह ने कहा कि रोडवेज-पनबस-पीआरटीसी मैनेजमेंट के साथ मंगलवार को मीटिंग हुई, जिसमें कर्मचारियों को रिहा करने और नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों को बहाल करने पर सहमति बन गई। जिससे आज मंगलवार दोपहर से हड़ताल खत्म कर दी और डिपो में खड़ी बसें सड़कों पर वापस दौड़ने लगी हैं।
- अफसरों के न मानने के कारण देरी से खत्म हुई हड़ताल: रोडवेज-पनबस-पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रदेश प्रधान रेशम सिंह ने कहा कि सरकार के साथ मीटिंग में कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी। लेकिन अफसरों ने उसे लागू करने में वक्त लगा दिया, जिसकी वजह से हड़ताल देरी से खत्म हुई है। मैनेजमेंट से जो भी इश्यू थे सभी हल हो गए हैं।
ट्रांसपोर्ट मंत्री बोले- एक हजार नई बसे खरीदेंगे पंजाब के ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने कहा कि धरना लगाने वाले मुलाजिम भी हमारे परिवार के ही हैं। किलोमीटर स्कीम पहले वाली सरकारों के समय लागू की गई थी। जिसमें बेरोजगार लोगों को परमिट दिए जाते हैं। इसमें सरकार अपनी बसें भी डालती है। अब सरकार पनबस-पीआरटीसी में 900 बसें लगाएगी। 100 मिडी बस भी पीआरटीसी में डाली जाएंगी, जिनकी खरीदारी सरकार करेगी।
यूनियन प्रधान बोले- सरकार सभी साथियों को रिहा कर रही
पनबस-पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रदेश प्रधान रेशम सिंह ने कहा कि हड़ताल के दौरान हुई सभी कार्रवाई को वापस ले लिया गया है और सभी कर्मचारियों को भी बहाल कर दिया गया है। पुलिस हिरासत या जेल भेजे गए साथियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
रोपड़ और नवांशहर डिपो के साथियों को रिहा कर दिया गया है, बाकी साथियों को भी सरकार रिहा कर रही है। 900 सरकारी बसें लाने पर सहमति बन चुकी है। सरकार इसका ऐलान भी कर चुकी है। अन्य मांगों को लागू करने के लिए जल्द ही पंजाब के परिवहन मंत्री और अधिकारियों के साथ एक और बैठक की जाएगी।
