पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का महापर्व: विधानसभा चुनावों में दर्ज हुआ ऐतिहासिक 92.47% मतदान, आजादी के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड**

कोलकाता/नई दिल्ली (SHABD, AIR, HQ):** पश्चिम बंगाल ने अपने लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखते हुए दो चरणों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में **92.47 प्रतिशत** का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया है। आजादी के बाद से अब तक राज्य में यह किसी भी चुनाव में भागीदारी का सबसे उच्चतम स्तर है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 29 अप्रैल को दूसरे चरण के समापन पर शाम तक लगभग **91.66 प्रतिशत** वोट पड़े, जबकि 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में **93.19 प्रतिशत** का भारी मतदान हुआ था। दोनों चरणों को मिलाकर कुल औसत मतदान 92.47 प्रतिशत रहा, जो राज्य की जागरूक राजनीतिक चेतना को दर्शाता है।

राज्य के लगभग **6.81 करोड़** मतदाताओं के इस विशाल आधार में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक रही। जहां **92.28 प्रतिशत महिला मतदाताओं** ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, वहीं पुरुषों का भागीदारी प्रतिशत **91.07** रहा। इस रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े ने साल 2011 के विधानसभा चुनावों के रिकॉर्ड (84.72%) को काफी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड अभी भी त्रिपुरा के नाम है, जिसने 2013 के चुनावों में 93.61% मतदान दर्ज किया था।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस अभूतपूर्व भागीदारी के लिए बंगाल के मतदाताओं की सराहना करते हुए इसे ‘लोकतंत्र का असली उत्सव’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के प्रत्येक नागरिक को इस गौरवशाली भागीदारी के लिए सलाम करता है। उल्लेखनीय है कि इस बार असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में भी रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है। अब सभी की निगाहें **4 मई** पर टिकी हैं, जब पश्चिम बंगाल के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी के चुनावी नतीजों की घोषणा की जाएगी। इसी दिन कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों के उपचुनावों के परिणाम भी घोषित होंगे।

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